गोल्डमैन सैक्स का बड़ा दावा: 2026 में 6.9% रहेगी भारत की GDP, अमेरिका के साथ 'ट्रेड डील' बनेगी गेमचेंजर

दुनिया की दिग्गज निवेश बैंकिंग फर्म गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने भारत की आर्थिक रफ्तार पर अपनी नवीनतम रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत आने वाले वर्षों में अपनी मजबूत विकास दर को बरकरार रखेगा। अमेरिकी निवेश बैंक ने अनुमान लगाया है कि भारत की वास्तविक जीडीपी (Real GDP) कैलेंडर वर्ष 2026 में 6.9% और 2027 में 6.8% की दर से बढ़ेगी।

10 Feb 2026  |  36

मुंबई | दुनिया की दिग्गज निवेश बैंकिंग फर्म गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने भारत की आर्थिक रफ्तार पर अपनी नवीनतम रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत आने वाले वर्षों में अपनी मजबूत विकास दर को बरकरार रखेगा। अमेरिकी निवेश बैंक ने अनुमान लगाया है कि भारत की वास्तविक जीडीपी (Real GDP) कैलेंडर वर्ष 2026 में 6.9% और 2027 में 6.8% की दर से बढ़ेगी।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का मिलेगा 'बूस्ट'

रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार समझौते (Trade Deal) को बताया गया है। गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि:

इस समझौते से भारत की वार्षिक जीडीपी वृद्धि में 0.2% (20 बेसिस पॉइंट्स) की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी।

अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ कम होने से निर्यात प्रतिस्पर्धा (Export Competitiveness) बढ़ेगी।

विशेष रूप से कपड़ा (Textiles) और रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewelry) जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा।

मुद्रास्फीति और आरबीआइ का रुख

रिपोर्ट में महंगाई को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं:

हेडलाइन मुद्रास्फीति: 2026 तक इसके 3.9% रहने की उम्मीद है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य के बेहद करीब है।

ब्याज दरें: गोल्डमैन सैक्स के मुख्य भारत अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता के अनुसार, चूंकि आरबीआइ ने पिछले वर्ष रेपो रेट में 125 आधार अंकों की बड़ी कटौती की थी, इसलिए निकट भविष्य में दरों में और अधिक कटौती की संभावना कम है।

खपत और निवेश के मोर्चे पर राहत

अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले अन्य प्रमुख कारक इस प्रकार हैं:

नकदी का प्रवाह: बैंकिंग प्रणाली में 6.3 ट्रिलियन रुपये डालने के उपायों से बैंक क्रेडिट ग्रोथ को मजबूती मिलेगी।

खपत में सुधार: आयकर और जीएसटी में कटौती के कारण शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मांग (Consumption) बढ़ रही है। अनुमान है कि 2026 में वास्तविक खपत वृद्धि 7.7% तक पहुँच सकती है।

विदेशी मुद्रा: व्यापार समझौते के बाद भारतीय रुपये (INR) पर दबाव कम हुआ है और यह उभरते बाजारों की मुद्राओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

शांतनु सेनगुप्ता (मुख्य अर्थशास्त्री): "हालांकि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी टैरिफ जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन भारत का घरेलू विकास मॉडल और बेहतर वित्तीय स्थितियां इसे सुरक्षित और मजबूत बनाए रखेंगी।"

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