निवेश का बदला 'मिजाज': शेयर बाजार से मोहभंग या सावधानी? गोल्ड और डेट फंड्स में उमड़ा निवेशकों का सैलाब

भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और ऊंचे वैल्युएशंस ने निवेशकों की रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। 'रिस्क' लेने के बजाय अब निवेशक 'सेफ्टी' को प्राथमिकता दे रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जनवरी 2026 के लिए जारी आंकड़े स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि बाजार में पैसा अब इक्विटी से निकलकर सुरक्षित ठिकानों की ओर मुड़ रहा है।

10 Feb 2026  |  41

नई दिल्ली |भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और ऊंचे वैल्युएशंस ने निवेशकों की रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। 'रिस्क' लेने के बजाय अब निवेशक 'सेफ्टी' को प्राथमिकता दे रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जनवरी 2026 के लिए जारी आंकड़े स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि बाजार में पैसा अब इक्विटी से निकलकर सुरक्षित ठिकानों की ओर मुड़ रहा है।

इक्विटी फंड्स में उत्साह पड़ा ठंडा

पिछले दो महीनों से इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश की रफ्तार सुस्त बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार:

निवेश में गिरावट: सक्रिय रूप से प्रबंधित इक्विटी फंड्स में शुद्ध निवेश जनवरी में 14% घटकर ₹24,028.59 करोड़ रह गया (दिसंबर में यह ₹28,054.06 करोड़ था)।

सतर्कता: बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए निवेशक अब नई पूंजी लगाने में 'वेट एंड वॉच' की नीति अपना रहे हैं।

सोने की चमक हुई दोगुनी: गोल्ड ETF में रिकॉर्ड निवेश

जहाँ शेयर बाजार से निवेशक पैर पीछे खींच रहे हैं, वहीं सोने (Gold ETF) ने निवेश के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

जनवरी में गोल्ड ईटीएफ में निवेश दोगुना होकर ₹24,040 करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया।

कारण: जनवरी में जहाँ निफ्टी और सेंसेक्स में 3% से अधिक की गिरावट आई, वहीं घरेलू सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में 24% की जबरदस्त तेजी देखी गई। निवेशक अब पोर्टफोलियो को बैलेंस करने के लिए सोने को सबसे सुरक्षित ढाल मान रहे हैं।

डेट और हाइब्रिड फंड्स की 'घर वापसी'

दिसंबर में डेट फंड्स से भारी निकासी देखी गई थी, लेकिन जनवरी में पासा पूरी तरह पलट गया है:

डेट फंड्स: जनवरी में इसमें ₹74,827.13 करोड़ का भारी-भरकम निवेश आया।

हाइब्रिड फंड्स: इक्विटी और डेट के मिश्रण वाली इन योजनाओं में भी निवेश बढ़कर ₹17,356 करोड़ के पार पहुँच गया है।

SIP: छोटे निवेशकों का अटूट भरोसा

बाजार की अस्थिरता के बीच एक सुखद पहलू यह है कि सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान  के जरिए होने वाला निवेश अभी भी स्थिर है। जनवरी में SIP का योगदान ₹31,002 करोड़ के स्तर पर बना रहा। यह दर्शाता है कि खुदरा निवेशक लंबी अवधि के अपने नियमित निवेश को लेकर अब भी अडिग हैं।

विशेषज्ञों का निष्कर्ष: भारतीय निवेशक अब परिपक्व हो रहे हैं। वे केवल बाजार की तेजी के पीछे भागने के बजाय 'एसेट एलोकेशन' (संपत्ति का सही बँटवारा) पर ध्यान दे रहे हैं। वर्तमान में 'सावधानी' ही निवेशकों की सबसे बड़ी रणनीति बनकर उभरी है।

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