केंद्रीय बजट से पहले, क्रॉपलाइफ इंडिया ने किसानों से इनोवेशन के लिए सपोर्ट मांगा, क्लाइमेट स्ट्रेस और बढ़ती इनपुट कॉस्ट किसानों पर भारी

बजट 2026-27 के आगामी सत्र से पहले, क्रॉपलाइफ इंडिया (CropLife India)—जो भारत की 17 अग्रणी आरएंडडी-संचालित फसल विज्ञान कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है—ने सरकार से कृषि क्षेत्र में नवाचार और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए बड़े सुधारों की मांग की है।

11 Feb 2026  |  40

बजट 2026-27 के आगामी सत्र से पहले, क्रॉपलाइफ इंडिया (CropLife India)—जो भारत की 17 अग्रणी आरएंडडी-संचालित फसल विज्ञान कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है—ने सरकार से कृषि क्षेत्र में नवाचार और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए बड़े सुधारों की मांग की है।

यहाँ इस मांग पत्र और इसके निहितार्थों की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

1. मुख्य मांगें: बजट 2026-27 के लिए प्राथमिकताएं

क्रॉपलाइफ इंडिया ने मुख्य रूप से अनुसंधान और विकास (R&D) को प्रोत्साहित करने और किसानों के लिए लागत कम करने पर ध्यान केंद्रित किया है:

R&D पर 200% भारित कटौती (Weighted Deduction): नवाचार को गति देने के लिए कंपनियों के अनुसंधान खर्च पर 200% टैक्स कटौती की मांग की गई है। यह उन इकाइयों के लिए हो जिनकी न्यूनतम अचल संपत्ति ₹50 करोड़ और वार्षिक R&D खर्च ₹10 करोड़ हो।

GST में भारी कटौती (18% से 5%): वर्तमान में कृषि रसायनों पर 18% GST लगता है। क्रॉपलाइफ का तर्क है कि इसे अन्य कृषि आदानों (Inputs) की तरह 5% के स्लैब में लाया जाना चाहिए ताकि आधुनिक फसल सुरक्षा समाधान किसानों के लिए सस्ते हो सकें।

समान सीमा शुल्क (Uniform Customs Duty): तकनीकी कच्चे माल और फॉर्मूलेशन दोनों के लिए एक स्थिर और समान बुनियादी सीमा शुल्क बनाए रखने का आग्रह किया गया है ताकि लागत में विसंगति न आए।

2. जलवायु परिवर्तन और कीट प्रतिरोध की चुनौती

क्रॉपलाइफ इंडिया के अध्यक्ष, श्री अंकुर अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि बदलता मौसम और कीटों में बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता (Pest Resistance) किसानों की आय के लिए बड़ा खतरा है।

आधुनिक फसल सुरक्षा क्यों आवश्यक है?

कम खुराक, अधिक प्रभाव: नए उत्पाद कम मात्रा में उपयोग होने के बावजूद अधिक प्रभावी होते हैं, जिससे पर्यावरण पर रसायनों का भार कम होता है।

खाद्य सुरक्षा मानक: वैश्विक बाजारों में निर्यात के लिए कड़े 'रेसिड्यू' (अवशेष) मानकों का पालन करना जरूरी है, जो केवल आधुनिक रसायनों से ही संभव है।

आत्मनिर्भर भारत: घरेलू R&D को बढ़ावा देने से भारत फसल विज्ञान में वैश्विक केंद्र बन सकता है।

3. कृषि विस्तार सेवाओं (Extension Services) का सुदृढ़ीकरण

केवल तकनीक का होना काफी नहीं है, उसका सही उपयोग भी अनिवार्य है। क्रॉपलाइफ ने सरकार से आग्रह किया है कि:

GAP (अच्छी कृषि पद्धतियाँ): राष्ट्रीय स्तर पर किसानों को आधुनिक और सुरक्षित खेती के तरीकों का प्रशिक्षण दिया जाए।

किसान सुरक्षा: कीटनाशकों के जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय वित्त पोषण के साथ एक मजबूत ढांचा तैयार किया जाए।

4. क्रॉपलाइफ इंडिया का प्रभाव

यह संगठन भारत के फसल सुरक्षा बाजार के लगभग 70% हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है और देश में पेश किए जाने वाले 95% नए अणुओं (Molecules) के लिए जिम्मेदार है। इनके सदस्य वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष 6 बिलियन अमेरिकी डॉलर अनुसंधान पर खर्च करते हैं।

निष्कर्ष

क्रॉपलाइफ इंडिया का यह प्रस्ताव 'विज्ञान-आधारित' नीतियों की वकालत करता है। यदि सरकार इन मांगों को बजट में शामिल करती है, तो यह न केवल खेती की लागत को कम करेगा, बल्कि भारतीय कृषि को 'जलवायु-लचीला' (Climate-Resilient) बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

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