सोने की 'आग' में झुलसा आभूषण बाजार: छोटे जौहरी संकट में, अब 18K और 9K गोल्ड बना ग्राहकों की पसंद

भारत का आभूषण उद्योग इस समय एक बड़े संक्रमण काल से गुजर रहा है। सोने की कीमतें ₹1,60,000 प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंच गई हैं (MCX पर यह लगभग ₹1,59,750 दर्ज की गई)। इस बेतहाशा वृद्धि ने जहाँ बड़े ब्रांड्स को नए प्रयोगों के लिए मजबूर किया है, वहीं छोटे और पारंपरिक व्यापारियों के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है।

13 Feb 2026  |  33

मुंबई/नई दिल्ली | भारत का आभूषण उद्योग इस समय एक बड़े संक्रमण काल से गुजर रहा है। सोने की कीमतें ₹1,60,000 प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंच गई हैं (MCX पर यह लगभग ₹1,59,750 दर्ज की गई)। इस बेतहाशा वृद्धि ने जहाँ बड़े ब्रांड्स को नए प्रयोगों के लिए मजबूर किया है, वहीं छोटे और पारंपरिक व्यापारियों के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है।

1. खरीदारी के पैटर्न में बड़ा बदलाव: शुद्धता से समझौता

महंगाई के दबाव में अब भारतीय ग्राहक सोने की शुद्धता के मानक बदल रहे हैं।

18K और 9K की मांग: जो ग्राहक पहले 22 कैरेट (22K) से कम पर बात नहीं करते थे, वे अब 18 कैरेट और यहाँ तक कि 9 कैरेट के विकल्पों की ओर मुड़ रहे हैं।

गिफ्टिंग सेगमेंट का अंत: मुंबई के झवेरी बाजार के व्यापारियों के अनुसार, उपहार देने के लिए सोने-चांदी की खरीदारी लगभग 80% तक गिर गई है। अब लोग शादी-ब्याह में भारी गहनों के बजाय हल्के वजन (Lightweight) वाले आभूषणों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

2. छोटे व्यापारियों पर 'दोहरी मार'

बड़े कॉर्पोरेट चेन (जैसे टाइटन, सेनको) अपनी इन्वेंट्री प्रबंधन और विविधता के कारण टिके हुए हैं, लेकिन छोटे सुनारों की हालत पतली है:

वॉल्यूम में गिरावट: झवेरी बाजार के कारोबारियों का अनुमान है कि बिक्री के वॉल्यूम में 75% तक की कमी आई है।

छंटनी का दौर: लागत कम करने के लिए कई छोटे दुकानदारों ने कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है।

पुराने सोने का सहारा: वर्तमान में लगभग 45% लेनदेन पुराने सोने को नए से बदलने (Exchange) के रूप में हो रहे हैं, जिससे नए सोने की शुद्ध बिक्री (Fresh Sales) में भारी गिरावट आई है।

3. शेयर बाजार पर असर: ज्वेलरी स्टॉक्स में हलचल

सोने की कीमतों में अस्थिरता और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं का असर सूचीबद्ध कंपनियों (Listed Entities) पर भी दिखा है:

कल्याण ज्वेलर्स: अप्रैल 2025 से अब तक इसके शेयर में लगभग 19% की गिरावट आई है।

अन्य गिरावट: पीसी ज्वेलर्स, राजेश एक्सपोर्ट्स और पीएन गाडगिल जैसे शेयरों में 6% से 23% तक की कमी देखी गई है।

अपवाद: टाइटन (Titan) जैसी विविधतापूर्ण कंपनियों ने इस दौरान मजबूती दिखाई है।

4. सरकार का नया कदम: 9K गोल्ड की हॉलमार्किंग

बदलते रुझानों को देखते हुए भारत सरकार ने जुलाई 2025 से 9 कैरेट (9K) गोल्ड के लिए भी हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी है। इसका उद्देश्य कम बजट वाले ग्राहकों को गुणवत्ता का भरोसा देना और सस्ते आभूषण बाजार को व्यवस्थित करना है।

भविष्य का अनुमान

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के अनुसार, 2026 में भारत की कुल सोने की मांग गिरकर 600-700 मीट्रिक टन रह सकती है, जो पिछले 5 वर्षों का निचला स्तर होगा। हालांकि, निवेश के नजरिए से गोल्ड ईटीएफ (ETF) में दिलचस्पी बढ़ी है, लेकिन आभूषण के रूप में इसकी चमक फिलहाल फीकी पड़ती दिख रही है।

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