वेलेंटाइन डे पर क्यों बढ़ जाता है तनाव? जानें इसके पीछे का विज्ञान और विशेषज्ञों की सलाह

वेलेंटाइन डे को अक्सर भव्य आयोजनों और 'परफेक्ट' रिश्तों के उत्सव के रूप में दिखाया जाता है। लेकिन मार्ग माइंड केयर के मनोचिकित्सक डॉ. एकांश शर्मा का कहना है कि प्यार का यह त्योहार कई लोगों के लिए 'परफॉर्मेंस प्रेशर' बन जाता है। उनके अनुसार, इसका कारण प्यार से नफरत नहीं, बल्कि उससे जुड़ी उम्मीदें और हमारे मस्तिष्क की जटिल कार्यप्रणाली है।

14 Feb 2026  |  48

नई दिल्ली: वेलेंटाइन डे को अक्सर भव्य आयोजनों और 'परफेक्ट' रिश्तों के उत्सव के रूप में दिखाया जाता है। लेकिन मार्ग माइंड केयर के मनोचिकित्सक डॉ. एकांश शर्मा का कहना है कि प्यार का यह त्योहार कई लोगों के लिए 'परफॉर्मेंस प्रेशर' बन जाता है। उनके अनुसार, इसका कारण प्यार से नफरत नहीं, बल्कि उससे जुड़ी उम्मीदें और हमारे मस्तिष्क की जटिल कार्यप्रणाली है।

तुलना का मनोविज्ञान और सोशल मीडिया

मनोवैज्ञानिक स्तर पर, वेलेंटाइन डे तुलना (Comparison) की भावना को बढ़ाता है। सोशल मीडिया पर दूसरों के महंगे तोहफे, डिनर डेट और खुशहाल तस्वीरों को देखकर लोग अक्सर अपने जीवन या रिश्तों में कमी महसूस करने लगते हैं।

अकेलापन: जो लोग सिंगल हैं या हाल ही में किसी अलगाव (Breakup) से गुजरे हैं, उनमें यह दिन हीन भावना और अकेलेपन को ट्रिगर कर सकता है।

दिखावे का दबाव: रिश्तों में मौजूद लोग भी अक्सर अपनी मोहब्बत को 'साबित' करने के दबाव में रहते हैं, जिससे रिश्ते की स्वाभाविकता खत्म होने लगती है।

क्या कहता है न्यूरोसाइंस? (मस्तिष्क का विज्ञान)

प्यार सिर्फ एक भावना नहीं, बल्कि एक जैविक प्रक्रिया है। डॉ. शर्मा बताते हैं कि रोमांस के दौरान हमारे मस्तिष्क में कई न्यूरोकेमिकल्स सक्रिय होते हैं:

डोपामाइन (Dopamine): यह 'रिवॉर्ड' हार्मोन है, जो जुड़ाव की उम्मीद में बढ़ता है।

ऑक्सीटोसिन (Oxytocin): यह विश्वास और बॉन्डिंग को मजबूत करता है।

कोर्टिसोल (Cortisol): जब पार्टनर का जवाब नहीं आता या योजनाएं स्पष्ट नहीं होतीं, तो तनाव हार्मोन 'कोर्टिसोल' बढ़ने लगता है।

रोचक तथ्य: 'नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन' के शोध के अनुसार, हमारा मस्तिष्क सामाजिक अस्वीकृति (Social Rejection) को उसी क्षेत्र में प्रोसेस करता है जहाँ वह शारीरिक दर्द को महसूस करता है। इसीलिए दिल टूटने पर शारीरिक दर्द जैसा अनुभव होता है।

तनाव से निपटने के विज्ञान-आधारित तरीके

डॉ. शर्मा ने वेलेंटाइन डे के भावनात्मक बोझ को कम करने के लिए कुछ प्रभावी रणनीतियां साझा की हैं:

स्पष्ट संवाद (Communicate Clearly): अपने पार्टनर से अपनी उम्मीदों के बारे में खुलकर बात करें। मानकर न चलें कि उन्हें सब पता होगा।

सोशल मीडिया से दूरी: तुलना के जाल से बचने के लिए इस दिन सोशल मीडिया का कम से कम उपयोग करें।

परिभाषा बदलें: प्यार सिर्फ रोमांटिक पार्टनर तक सीमित नहीं है। इसे दोस्तों, परिवार या खुद के साथ (Self-love) भी मनाया जा सकता है।

आत्म-करुणा (Self-Compassion): खुद के प्रति दयालु रहें। याद रखें कि कोई एक दिन आपकी योग्यता या आपके रिश्ते की सफलता तय नहीं कर सकता।

निष्कर्ष

प्यार कोई इवेंट या 'परफॉरमेंस' नहीं है, बल्कि निरंतर चलने वाली एक प्रक्रिया है। वेलेंटाइन डे की एंग्जायटी से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम दिखावे के बजाय असलियत और भावनात्मक सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

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