बाजार में लौटी विदेशी रौनक: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद FPI ने झोंके ₹19,675 करोड़, पर शुक्रवार की गिरावट ने बढ़ाई चिंता

भारतीय शेयर बाजार के लिए फरवरी का महीना एक बड़ी राहत लेकर आया है। लगातार तीन महीनों की भारी बिकवाली के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने एक बार फिर घरेलू बाजार का रुख किया है। फरवरी के पहले दो हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने 19,675 करोड़ रुपये का निवेश कर बाजार में नई जान फूंकने की कोशिश की है।

15 Feb 2026  |  32

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार के लिए फरवरी का महीना एक बड़ी राहत लेकर आया है। लगातार तीन महीनों की भारी बिकवाली के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने एक बार फिर घरेलू बाजार का रुख किया है। फरवरी के पहले दो हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने 19,675 करोड़ रुपये का निवेश कर बाजार में नई जान फूंकने की कोशिश की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (Trade Deal) की सकारात्मक उम्मीदों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में आई नरमी ने विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से बहाल किया है।

निवेश के आंकड़ों में 'यू-टर्न'

डिपॉजिटरी के हालिया आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों ने पिछले तीन महीनों की मंदी को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, वर्ष 2025 अब तक विदेशी निवेश के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहा है।

पिछले महीनों का रिपोर्ट कार्ड: | महीना | निवेश की स्थिति (FPI) | | :--- | :--- | | नवंबर 2024 | ₹3,765 करोड़ (निकासी) | | दिसंबर 2024 | ₹22,611 करोड़ (निकासी) | | जनवरी 2025 | ₹35,962 करोड़ (निकासी) | | फरवरी (15 तारीख तक) | ₹19,675 करोड़ (निवेश) |

ध्यान देने वाली बात: साल 2025 में अब तक कुल मिलाकर 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी हो चुकी है, जो हाल के वर्षों में विदेशी निवेश का सबसे कमजोर दौर माना जा रहा है।

क्यों बदला विदेशी निवेशकों का मूड?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी में आए इस सकारात्मक बदलाव के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में सुधार की संभावनाओं ने निवेशकों को उत्साहित किया है।

टैरिफ नीतियों में स्पष्टता: अमेरिका की संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर जो चिंताएं थीं, उनमें अब कुछ स्थिरता दिख रही है।

आकर्षक वैल्युएशन: भारी बिकवाली के बाद कई प्रमुख शेयरों के दाम आकर्षक स्तर पर आ गए हैं।

शुक्रवार की गिरावट ने फिर चौंकाया

भले ही विदेशी निवेश बढ़ा है, लेकिन घरेलू बाजार पर वैश्विक चिंताओं का साया अब भी बरकरार है। शुक्रवार (13 फरवरी) को भारतीय शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुए।

Sensex: 1,048 अंक (1.25%) गिरकर 82,626.76 पर बंद हुआ।

Nifty: 336.10 अंक (1.30%) की गिरावट के साथ 25,471.10 पर आ गया।

गिरावट की वजह: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव और कमजोर वैश्विक संकेतों ने निवेशकों को मुनाफ़ा वसूली (Profit Booking) के लिए मजबूर किया।

आगे क्या?

बाजार के दिग्गजों का मानना है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा टिके रहने के लिए वैश्विक बाजारों में स्थिरता और मौद्रिक नीतियों पर और अधिक स्पष्टता की आवश्यकता होगी। यदि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की शर्तें और अधिक अनुकूल रहती हैं, तो फरवरी के अंत तक निवेश का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

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