बिहार विधानसभा में संग्राम: रामविलास पासवान को 'बेचारा' कहने पर बवाल, RJD ने दागा 85% आरक्षण का दांव
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को जबरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिला। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत रामविलास पासवान के सम्मान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शुरू हुई जुबानी जंग ने सदन की कार्यवाही को ठप कर दिया। विवाद इतना बढ़ा कि स्पीकर प्रेम कुमार को सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
16 Feb 2026
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पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को जबरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिला। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत रामविलास पासवान के सम्मान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शुरू हुई जुबानी जंग ने सदन की कार्यवाही को ठप कर दिया। विवाद इतना बढ़ा कि स्पीकर प्रेम कुमार को सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
विवाद की जड़: "बेचारा" शब्द पर भड़की LJP(RV)
मामले की शुरुआत बोधगया से आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत के एक बयान से हुई। सत्ता पक्ष, विशेषकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायकों का आरोप है कि पिछले सप्ताह सदन में भाषण के दौरान सर्वजीत ने दिवंगत नेता रामविलास पासवान को 'बेचारा' कहकर संबोधित किया।
सत्ता पक्ष की मांग: LJP(R) के विधायकों ने इसे दलितों के 'वैचारिक पिता' का अपमान बताया और राजद से सार्वजनिक माफी की मांग की।
विरोध का तरीका: रविवार को चिराग पासवान की पार्टी ने तेजस्वी यादव का पुतला जलाया था, जिसकी गूंज सोमवार को सदन में भी सुनाई दी।
RJD का पलटवार: 85% आरक्षण का कार्ड
हंगामे के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक रुख अपनाया।
नया दांव: राजद विधायकों ने सदन में प्लेकार्ड लहराए, जिन पर पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण का कोटा 50% से बढ़ाकर 85% करने की मांग लिखी थी।
कुमार सर्वजीत की सफाई: मीडिया से बात करते हुए सर्वजीत ने कहा, "मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। मैंने केवल यह कहा था कि अगर आदरणीय रामविलास पासवान जी जीवित होते, तो आज दलितों के हालात ऐसे नहीं होते।" उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चिराग पासवान की पार्टी SC/ST और OBC अधिकारों पर हो रहे हमलों से ध्यान भटकाने के लिए यह हंगामा कर रही है।
सदन में दिखा हाई-वोल्टेज ड्रामा
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष के विधायक अपनी सीटों से उठकर वेल में आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
स्पीकर की अपील विफल: विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कई बार विधायकों से शांति बनाए रखने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन शोर-शराबा थमा नहीं।
LJP(R) का रुख: पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी ने स्पष्ट किया कि जब तक राजद इस "दलित विरोधी" कृत्य के लिए माफी नहीं मांगती, वे चुप नहीं बैठेंगे।
स्थगन: हंगामे के चलते सदन में कोई विधायी कार्य नहीं हो सका, जिसके बाद इसे दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
राजनीतिक मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि एक तरफ LJP(R) इसे दलित अस्मिता से जोड़कर राजद को घेर रही है, वहीं राजद ने 85% आरक्षण की मांग उठाकर 'मंडल राजनीति' को दोबारा हवा देने की कोशिश की है। चुनाव से पहले प्रतीकों और आरक्षण की यह जंग बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है।