डिजिटल क्रांति: कैश को पछाड़ भारत का नंबर-1 भुगतान माध्यम बना UPI; वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
भारत में डिजिटल भुगतान की लहर अब एक सुनामी का रूप ले चुकी है। वित्त मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब न केवल शहरों में बल्कि पूरे देश में लेनदेन का सबसे पसंदीदा माध्यम बनकर उभरा है। रिपोर्ट के आंकड़े गवाह हैं कि भारतीयों ने अब अपनी जेब में कैश रखने के बजाय स्मार्टफोन से स्कैन करना बेहतर समझा है।
16 Feb 2026
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नई दिल्ली: भारत में डिजिटल भुगतान की लहर अब एक सुनामी का रूप ले चुकी है। वित्त मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब न केवल शहरों में बल्कि पूरे देश में लेनदेन का सबसे पसंदीदा माध्यम बनकर उभरा है। रिपोर्ट के आंकड़े गवाह हैं कि भारतीयों ने अब अपनी जेब में कैश रखने के बजाय स्मार्टफोन से स्कैन करना बेहतर समझा है।
कैश बनाम डिजिटल: आंकड़ों की जुबानी
वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा आयोजित 'चिंतन शिविर' (13-14 फरवरी 2026) में पेश की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, भुगतान परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है:
UPI का दबदबा: कुल लेनदेन में UPI की हिस्सेदारी 57% तक पहुँच गई है।
कैश का गिरता ग्राफ: नकद लेनदेन अब सिमटकर 38% पर रह गया है।
दैनिक व्यवहार: रिपोर्ट बताती है कि 65% UPI यूजर्स दिन में कई बार डिजिटल ट्रांजेक्शन करते हैं, जो इसे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाता है।
सर्वे के मुख्य बिंदु: 15 राज्यों का विश्लेषण
यह रिपोर्ट 15 राज्यों के 10,378 उत्तरदाताओं (उपयोगकर्ता, व्यापारी और सेवा प्रदाता) के व्यापक प्राथमिक सर्वेक्षण पर आधारित है। विश्लेषण से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं:
उपयोग में सुगमता: इंस्टेंट फंड ट्रांसफर और आसान इंटरफेस के कारण सभी सामाजिक-आर्थिक वर्गों में डिजिटल भुगतान को अपनाया जा रहा है।
प्रोत्साहन का असर: भीम-यूपीआई (P2M) लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा दी जा रही प्रोत्साहन योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव दिखा है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 'रुपे' (RuPay) पर जोर
जहाँ UPI ने बाजी मार ली है, वहीं रिपोर्ट में रुपे डेबिट कार्ड को लेकर चिंता और समाधान दोनों साझा किए गए हैं। मंत्रालय ने जोर दिया है कि:
ग्रामीण और अर्ध-शहरी (Semi-urban) इलाकों में रुपे कार्ड के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए तत्काल हस्तक्षेप और विशेष कैंपेन की आवश्यकता है।
डिजिटल डिवाइड को कम करने के लिए जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाना अनिवार्य है।
"डिजिटल भुगतान अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि भारतीयों का व्यवहार बन चुका है। उपयोग में आसानी और त्वरित हस्तांतरण ने इसे कैश से आगे खड़ा कर दिया है।" - रिपोर्ट अंश
निष्कर्ष: भविष्य की राह
वित्त मंत्रालय का यह मूल्यांकन दर्शाता है कि भारत 'लेस-कैश' इकोनॉमी की ओर तेजी से बढ़ रहा है। अब चुनौती ग्रामीण भारत में रुपे कार्ड की स्वीकार्यता को UPI के बराबर लाने की है।