'फांसी घर' मामला: अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आखिरी मोहलत; 6 मार्च तक पेश होने का 'अंतिम' फरमान

दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने 'फांसी घर' विवाद में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित चार नेताओं को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आखिरी मौका दिया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को 6 मार्च 2026 तक अपना पक्ष रखना होगा।

16 Feb 2026  |  25

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने 'फांसी घर' विवाद में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित चार नेताओं को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आखिरी मौका दिया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को 6 मार्च 2026 तक अपना पक्ष रखना होगा।

इन नेताओं को जारी हुआ समन

समिति ने जिन चार प्रमुख व्यक्तियों को तलब किया है, उनमें शामिल हैं:

अरविंद केजरीवाल: पूर्व मुख्यमंत्री और AAP के राष्ट्रीय संयोजक।

मनीष सिसोदिया: पूर्व उपमुख्यमंत्री।

राम निवास गोयल: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष।

राखी बिरला: पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला 9 अगस्त 2022 को दिल्ली विधानसभा परिसर के भीतर उद्घाटित किए गए ‘फांसी घर’ की प्रामाणिकता से जुड़ा है। मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस उद्घाटन से जुड़ी परिस्थितियों और प्रक्रियात्मक मूल्यांकन पर सवाल उठाते हुए विशेषाधिकार हनन का मामला उठाया था। समिति को यह जांचने का निर्देश दिया गया था कि क्या उद्घाटन से जुड़ी जानकारियां तथ्यात्मक रूप से सही थीं।

नेताओं ने मांगी थी मोहलत

सोमवार को हुई समिति की बैठक में चारों नेताओं द्वारा दिए गए लिखित जवाबों पर विचार किया गया।

विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत के अनुसार, अरविंद केजरीवाल ने अपने जवाब में 2 से 6 मार्च के बीच किसी भी दिन पेश होने का विकल्प दिया था।

इसी तरह अन्य नेताओं ने भी कुछ समय की मांग की थी।

समिति ने इन अनुरोधों को स्वीकार तो किया है, लेकिन साथ ही इसे 'आखिरी मौका' करार देते हुए 6 मार्च की समय-सीमा तय कर दी है।

"निष्पक्ष और व्यापक जांच पूरी करने के लिए सभी का सहयोग अनिवार्य है। संस्थागत अखंडता को बनाए रखने के लिए यह अंतिम उपस्थिति सुनिश्चित की गई है।" - प्रद्युम्न सिंह राजपूत, अध्यक्ष, विशेषाधिकार समिति

पुरानी अनुपस्थिति पर सख्त रुख

बता दें कि इन नेताओं को पहले भी कई बार अपना पक्ष रखने के अवसर दिए गए थे, लेकिन वे समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। इस बार समिति (जिसमें सूर्य प्रकाश खत्री, अभय कुमार वर्मा और अजय कुमार महावर जैसे सदस्य शामिल हैं) ने दोहराया है कि जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ट्रेंडिंग