परमाणु शक्ति में भारत का शंखनाद: तारापुर बना 'एशिया का प्रथम' स्वदेशी तकनीक से पुनर्जीवित संयंत्र

भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिसने वैश्विक मंच पर देश के वैज्ञानिकों का लोहा मनवा दिया है। महाराष्ट्र के पालघर स्थित देश के सबसे पुराने तारापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (TAPS) की यूनिट-1 ने पूर्णतः स्वदेशी तकनीक से जीर्णोद्धार (Renovation) के बाद पुनः 160 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू कर दिया है।

17 Feb 2026  |  30

परमाणु शक्ति में भारत का शंखनाद: तारापुर बना 'एशिया का प्रथम' स्वदेशी तकनीक से पुनर्जीवित संयंत्र

मुंबई/पालघर। भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिसने वैश्विक मंच पर देश के वैज्ञानिकों का लोहा मनवा दिया है। महाराष्ट्र के पालघर स्थित देश के सबसे पुराने तारापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (TAPS) की यूनिट-1 ने पूर्णतः स्वदेशी तकनीक से जीर्णोद्धार (Renovation) के बाद पुनः 160 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू कर दिया है।

इस सफलता के साथ ही भारत एशिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने बिना किसी विदेशी सहायता के, पूरी तरह अपनी तकनीक के दम पर किसी परमाणु ऊर्जा संयंत्र के जीवनकाल को विस्तार (Life Extension) दिया है।

57 साल की सेवा के बाद फिर हुआ 'जवान'

आमतौर पर परमाणु रिएक्टरों की आयु 40 से 50 वर्ष मानी जाती है, जिसके बाद अधिकांश देश उन्हें सेवामुक्त (De-commission) कर देते हैं। लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों की कार्यकुशलता ने इतिहास पलट दिया है:

स्थापना: टीएपीएस-1 और टीएपीएस-2 की शुरुआत 1969 में हुई थी।

नया जीवन: 57 वर्षों की शानदार सेवा के बाद, अब ये रिएक्टर अगले 15 से 20 वर्षों तक देश को स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए फिर से तैयार हैं।

अगला चरण: यूनिट-1 ग्रिड से जुड़ चुकी है, जबकि यूनिट-2 भी अगले कुछ महीनों में बिजली उत्पादन शुरू कर देगी।

इंजीनियरिंग का चमत्कार: कैसे हुआ कायाकल्प?

न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के नेतृत्व में 2020 से जारी इस जटिल प्रक्रिया में कई आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया गया:

3D लेजर स्कैनिंग: सटीक मरम्मत के लिए संयंत्र का डिजिटल मानचित्र तैयार किया गया।

पाइपिंग अपग्रेड: संक्षारण-प्रतिरोधी (Corrosion-resistant) सामग्री से पुरानी प्रणालियों को बदला गया।

आधुनिकीकरण: टरबाइन-जनरेटर और विद्युत प्रणालियों को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप अपडेट किया गया।

पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता

अपने पांच दशकों के सफर में इन दोनों इकाइयों ने 1,00,000 मिलियन यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली पैदा की है। इससे लगभग 86 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को रोका जा सका है, जो भारत के नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा योगदान है।

"डॉ. होमी जहांगीर भाभा के स्वप्न को साकार करते हुए तारापुर संयंत्र ने सिद्ध कर दिया है कि भारतीय इंजीनियरिंग न केवल टिकाऊ है, बल्कि नवाचार में भी विश्वस्तरीय है।"

मुख्य तथ्य: एक नज़र में

विवरणजानकारी
संयंत्र का नामतारापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (TAPS)
उपलब्धिस्वदेशी तकनीक से जीवनकाल विस्तार देने वाला एशिया का पहला देश
वर्तमान क्षमता160 मेगावाट (प्रति यूनिट)
रिएक्टर प्रकारBWR (उबलते पानी से चलने वाला रिएक्टर)
भविष्य की सेवाअगले 15-20 वर्षों तक परिचालन संभव

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