पंजाब की सियासत में 'सिद्धू' धमाका: क्या भाजपा में होगी 'ठोको ताली' की घर वापसी? तैयार हो रहा है हाई-प्रोफाइल रोडमैप

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर 'सिद्धू फैक्टर' ने हलचल मचा दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस के फायरब्रांड नेता नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में वापसी की जमीन तैयार हो चुकी है। कांग्रेस से नवजोत कौर के हालिया निष्कासन के बाद, सिद्धू दंपति का भाजपा की ओर झुकाव अब महज अटकलें नहीं, बल्कि एक ठोस 'रोडमैप' नजर आ रहा है।

17 Feb 2026  |  27

चंडीगढ़/नई दिल्ली |  पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर 'सिद्धू फैक्टर' ने हलचल मचा दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस के फायरब्रांड नेता नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में वापसी की जमीन तैयार हो चुकी है। कांग्रेस से नवजोत कौर के हालिया निष्कासन के बाद, सिद्धू दंपति का भाजपा की ओर झुकाव अब महज अटकलें नहीं, बल्कि एक ठोस 'रोडमैप' नजर आ रहा है।

कांग्रेस से बढ़ी दूरियां, मोदी-नीत‍ियों की तारीफ

पिछले कुछ हफ्तों से सिद्धू परिवार और कांग्रेस नेतृत्व (खासकर प्रदेश अध्यक्ष और राहुल गांधी) के बीच दरारें खुलकर सामने आई हैं।

निष्कासन का प्रभाव: फरवरी के पहले हफ्ते में नवजोत कौर सिद्धू को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने राहुल गांधी पर "धरातल से कटे होने" का सीधा हमला बोला।

बदलते सुर: सिद्धू दंपति लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की सराहना कर रहे हैं, जिसे भाजपा में उनकी वापसी के लिए 'पिच तैयार' करने के तौर पर देखा जा रहा है।

भाजपा का 'रोडमैप' और आंतरिक चुनौतियां

सूत्रों के अनुसार, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पंजाब में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सिद्धू को एक 'हिंदू चेहरे' और 'क्राउड पुलर' के रूप में देख रहा है। हालांकि, घर वापसी की यह राह कांटों भरी है:

कैप्टन अमरिंदर सिंह का विरोध: पूर्व मुख्यमंत्री और अब भाजपा के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ सिद्धू की पुरानी अदावत किसी से छिपी नहीं है। कैप्टन और मनोरंजन कालिया जैसे पुराने नेता इस वापसी के सख्त खिलाफ हैं।

समन्वय की कोशिश: भाजपा आलाकमान इसी महीने के अंत तक इन विरोधियों से बात कर एक बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर सकता है।

सिद्धू की वापसी क्यों है भाजपा के लिए जरूरी?

शहरी वोट बैंक: भाजपा को लगता है कि सिद्धू की वाकपटुता शहरी हिंदू मतदाताओं को पार्टी की ओर खींचने में मदद कर सकती है।

अकाली दल से दूरी: शिरोमणि अकाली दल के साथ संबंधों में उतार-चढ़ाव के बीच भाजपा को पंजाब में एक ऐसे कद्दावर चेहरे की तलाश है जो अकेले दम पर माहौल बदल सके।

अगला कदम: महीने के अंत में बड़ा फैसला संभव

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि फरवरी के अंत तक सिद्धू के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला हो सकता है। यदि सिद्धू भाजपा में लौटते हैं, तो यह पंजाब में कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका होगा और 2027 के चुनावों के समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।

विशेष टिपणी: नवजोत कौर सिद्धू ने हाल ही में एक रैली में कहा था कि "कांग्रेस पंजाब नहीं जीतेगी", जो यह संकेत देता है कि उन्होंने और उनके पति ने नई पारी की पूरी तैयारी कर ली है।

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