स्टील सेक्टर में भारत का 'मिशन डाइवर्सिफिकेशन': यूरोप के कार्बन टैक्स की काट के लिए एशिया और मिडिल ईस्ट पर नज़र
निया के दूसरे सबसे बड़े कच्चा इस्पात (क्रूड स्टील) उत्पादक भारत ने अपनी निर्यात रणनीति में एक युगांतकारी बदलाव की तैयारी कर ली है। यूरोपीय संघ (EU) द्वारा लागू किए गए कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) यानी 'कार्बन टैक्स' के प्रभाव को बेअसर करने के लिए भारत अब यूरोप पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत अब मध्य पूर्व (Middle East) और एशिया के उभरते बाजारों में अपनी जगह बनाने के लिए आक्रामक रुख अपना रहा है।
17 Feb 2026
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नई दिल्ली: दुनिया के दूसरे सबसे बड़े कच्चा इस्पात (क्रूड स्टील) उत्पादक भारत ने अपनी निर्यात रणनीति में एक युगांतकारी बदलाव की तैयारी कर ली है। यूरोपीय संघ (EU) द्वारा लागू किए गए कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) यानी 'कार्बन टैक्स' के प्रभाव को बेअसर करने के लिए भारत अब यूरोप पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत अब मध्य पूर्व (Middle East) और एशिया के उभरते बाजारों में अपनी जगह बनाने के लिए आक्रामक रुख अपना रहा है।
क्यों पड़ी रणनीति बदलने की ज़रूरत?
भारत अब तक अपने कुल स्टील निर्यात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा यूरोप भेजता रहा है। लेकिन जनवरी से लागू हुए नए कार्बन टैक्स ने भारतीय स्टील को यूरोपीय बाजारों में महंगा और कम प्रतिस्पर्धी बना दिया है। स्टील सचिव संदीप पौंड्रिक ने हाल ही में संकेत दिया था कि इस कर के कारण प्रभावित निर्यात को बचाने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे।
नए बाजारों की तलाश: इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
भारत का नया लक्ष्य उन क्षेत्रों पर है जहाँ निर्माण और बुनियादी ढांचे का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है:
मध्य पूर्व: यहाँ चल रहे विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को देखते हुए भारत द्विपक्षीय समझौतों की कोशिश कर रहा है।
एशियाई बाजार: दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भी निर्यात के नए अवसर तलाशे जा रहे हैं ताकि बाजार में विविधता (Diversification) लाई जा सके।
चीन की चुनौती और सरकारी समर्थन
भारतीय स्टील कंपनियां अब सरकार से विशेष सहयोग की मांग कर रही हैं। वैश्विक बाजार में चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है, का दबदबा कायम है। चीनी निर्यात 2023 से ही रिकॉर्ड स्तर पर है, जिससे भारतीय कंपनियों को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। भारतीय उद्योग जगत चाहता है कि उन्हें ऐसी नीतियां मिलें जिससे वे यूरोपीय संघ के बाहर चीन का मुकाबला कर सकें।
कच्चे माल की सुरक्षा: विदेशों में खदानों पर नज़र
स्टील उत्पादन के लिए ज़रूरी कोकिंग कोल और अन्य खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत ने दोहरी रणनीति अपनाई है:
ऑफटेक एग्रीमेंट: लंबी अवधि के खरीद समझौते करना।
संपत्ति अधिग्रहण: विदेशों में सीधे खदानें खरीदना।
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) और NMDC जैसी दिग्गज कंपनियां ब्राजील, अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया में निवेश के मौके तलाश रही हैं। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया पर ध्यान केंद्रित है, क्योंकि भारत की 95% कोकिंग कोल की ज़रूरत आयात से पूरी होती है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की हिस्सेदारी आधे से अधिक है।