सिंधु जल संधि के बाद भारत का 'जल-प्रहार': रावी का पानी रोकेगा शाहपुर कंडी बांध, पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी
भारत और पाकिस्तान के बीच जारी कूटनीतिक तनाव अब नदियों के बहाव तक पहुँच गया है। सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित करने के कड़े रुख के बाद, भारत सरकार अब रावी नदी के उस अतिरिक्त पानी को पूरी तरह रोकने की तैयारी में है, जो अब तक बहकर पाकिस्तान जा रहा था। इस कदम से न केवल पाकिस्तान में जल संकट गहराने की आशंका है, बल्कि यह भारत की जल-संप्रभुता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
18 Feb 2026
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श्रीनगर/जम्मू: भारत और पाकिस्तान के बीच जारी कूटनीतिक तनाव अब नदियों के बहाव तक पहुँच गया है। सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित करने के कड़े रुख के बाद, भारत सरकार अब रावी नदी के उस अतिरिक्त पानी को पूरी तरह रोकने की तैयारी में है, जो अब तक बहकर पाकिस्तान जा रहा था। इस कदम से न केवल पाकिस्तान में जल संकट गहराने की आशंका है, बल्कि यह भारत की जल-संप्रभुता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
शाहपुर कंडी परियोजना: ४५ साल का इंतज़ार खत्म
जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राना ने पुष्टि की है कि पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर स्थित शाहपुर कंडी बांध परियोजना का काम अब अंतिम चरण में है। 31 मार्च तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। इस बांध की मदद से रावी नदी का वह पानी, जो भारत के हिस्से का होने के बावजूद पड़ोसी देश चला जाता था, अब सूखाग्रस्त भारतीय क्षेत्रों की प्यास बुझाएगा।
"पाकिस्तान को जाने वाला अतिरिक्त पानी रोका जाएगा और यह रोका भी जाना चाहिए। हमारे कठुआ और सांबा जैसे जिले सूखे की मार झेल रहे हैं, और यह प्रोजेक्ट हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।"
— जावेद अहमद राना, मंत्री, जम्मू-कश्मीर
परियोजना का सफर: इंदिरा गांधी से आज तक
शाहपुर कंडी बांध का इतिहास दशकों पुराना है, जो अब जाकर हकीकत बनने को तैयार है:
1979: रावी के पानी को रोकने के लिए पहली बार योजना बनाई गई।
1982: तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसकी आधारशिला रखी।
2008: इसे 'राष्ट्रीय परियोजना' घोषित किया गया।
लागत: कुल ₹3,394 करोड़ (पंजाब सरकार: ₹2,694 करोड़, केंद्र: ₹700 करोड़)।
किसे मिलेगा कितना लाभ?
यह बांध केवल पानी रोकने का जरिया नहीं, बल्कि उत्तर भारत के कृषि क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा:
| क्षेत्र | सिंचाई क्षमता (हेक्टेयर) | मुख्य लाभ |
|---|---|---|
| जम्मू (कठुआ और सांबा) | 32,000+ | सूखाग्रस्त कंडी क्षेत्र में हरियाली आएगी। |
| पंजाब | 5,000 | कृषि उत्पादन और जल स्तर में सुधार होगा। |
| पनबिजली | 206 मेगावाट | क्षेत्र की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद। |
सिंधु जल संधि और भारत का अधिकार
पूर्व सिंचाई मंत्री ताज मोहिदीन और अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि रावी नदी पर बांध के संचालन से सिंधु जल संधि का उल्लंघन नहीं होता। संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलज (पूर्वी नदियाँ) के पानी पर भारत का पूर्ण अधिकार है। शाहपुर कंडी बांध (55 मीटर ऊँचा और 7.7 किलोमीटर लंबा) इसी अधिकार का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करेगा।
निष्कर्ष: पाकिस्तान के लिए 'दोहरा झटका'
एक तरफ सिंधु जल संधि के निलंबन से उपजी अनिश्चितता और दूसरी तरफ रावी के पानी का रुकना—ये दोनों स्थितियाँ आने वाली गर्मियों में पाकिस्तान के कृषि और घरेलू जल प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। भारत के लिए यह प्रोजेक्ट सामरिक मजबूती और घरेलू विकास का एक सटीक संतुलन है।