सपनों की मौत: मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से आया बुलावा, पर हिट-एंड-रन ने छीन ली एकलौती संतान
"2025 मेरा 10 लाख डॉलर का साल होगा"—यह सपना 23 वर्षीय साहिल धनेश्वरा ने अपने कमरे की छत पर मार्कर से लिखा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस दिन साहिल के घर मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से एमबीए (MBA) का प्रवेश पत्र पहुँचा, उस दिन उसकी माँ इना माकन अपने बेटे की अस्थियाँ विसर्जित कर हरिद्वार से लौटी थीं। एक होनहार छात्र की मौत और न्याय के लिए एक अकेली माँ के संघर्ष की यह कहानी राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके की है।
18 Feb 2026
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नई दिल्ली: "2025 मेरा 10 लाख डॉलर का साल होगा"—यह सपना 23 वर्षीय साहिल धनेश्वरा ने अपने कमरे की छत पर मार्कर से लिखा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस दिन साहिल के घर मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से एमबीए (MBA) का प्रवेश पत्र पहुँचा, उस दिन उसकी माँ इना माकन अपने बेटे की अस्थियाँ विसर्जित कर हरिद्वार से लौटी थीं।
एक होनहार छात्र की मौत और न्याय के लिए एक अकेली माँ के संघर्ष की यह कहानी राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके की है।
हादसा: बिना लाइसेंस के दौड़ती स्कोर्पियो ने ली जान
घटना 3 फरवरी की है, जब साहिल अपनी माँ के ऑफिस जा रहा था। तभी विपरीत दिशा से आ रही एक तेज रफ्तार स्कोर्पियो ने उसकी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी।
आरोपी: कार एक 17 वर्षीय नाबालिग चला रहा था, जिसके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।
बेरहमी: इना माकन का आरोप है कि जब नाबालिग गाड़ी दौड़ा रहा था, तब कार में बैठी उसकी बहन सोशल मीडिया के लिए 'रील्स' बना रही थी।
अंतिम क्षण: दोपहर 1:20 बजे इना को कॉल मिला, और 1:57 बजे इंदिरा गांधी अस्पताल में साहिल को मृत घोषित कर दिया गया।
एकल माँ का इकलौता सहारा: संघर्षों से भरा था जीवन
साहिल को उसकी माँ ने अकेले पाल-पोसकर बड़ा किया था। वह न केवल अपनी पढ़ाई कर रहा था, बल्कि माँ के रियल एस्टेट व्यवसाय में हाथ भी बँटाता था।
मेहनत: आर्थिक तंगी के कारण एक बार उसे कॉलेज छोड़ना पड़ा, लेकिन पैसे जुड़ते ही वह फिर से पढ़ाई में जुट गया।
लक्ष्य: साहिल के कमरे की दीवार पर 'DREAM' लिखा था, जिसमें 'D' का अर्थ उसने 'अनुशासन' (Discipline) बताया था। वह अपनी माँ को एक बेहतर जीवन देना चाहता था।
कानून की पेचीदगियां और माँ का आक्रोश
आरोपी नाबालिग को पुलिस ने पकड़ा और सुधार गृह भेजा, लेकिन 10 फरवरी को उसे कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए अंतरिम जमानत मिल गई।
"पुलिस मुझसे कहती रही कि वह नाबालिग है, उसे कानूनन जमानत मिल जाएगी। उन्होंने यहाँ तक कहा कि अगर उसके पिता को गिरफ्तार किया भी गया, तो यह सिर्फ एक एक्सीडेंट है और उन्हें भी आसानी से जमानत मिल जाएगी।"
— इना माकन, साहिल की माँ
न्याय के लिए सोशल मीडिया का सहारा
कानून की सीमाओं से निराश होकर इना ने अब 'X' (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम का सहारा लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर रोते हुए अपील की है कि उनके बेटे को बेरहमी से कुचलने वाले और उसके परिवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साहिल के दोस्तों और परिवार का कहना है कि वे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक साहिल को न्याय नहीं मिल जाता।
संपादकीय टिप्पणी
यह मामला एक बार फिर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने और सड़क सुरक्षा कानूनों की गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े करता है। एक माँ का न्याय के लिए संघर्ष अब केवल उनका व्यक्तिगत दुख नहीं, बल्कि एक सामाजिक अभियान बन गया है।