युद्ध की छाया में वोरोनिश: जहाँ विज्ञापनों और सायरन के बीच थमी है ज़िंदगी
मास्को से लगभग 500 किलोमीटर दूर स्थित 10 लाख की आबादी वाला शहर वोरोनिश आज एक अजीब से द्वंद्व में जी रहा है। यह शहर भौगोलिक रूप से रूसी राजधानी की तुलना में यूक्रेन के फ्रंटलाइन के अधिक करीब है। यहाँ के शॉपिंग मॉल्स में अब केवल उपभोक्ता सामान ही नहीं, बल्कि युद्ध के हथियार भी कौतूहल का विषय हैं।
18 Feb 2026
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वोरोनिश, रूस मास्को से लगभग 500 किलोमीटर दूर स्थित 10 लाख की आबादी वाला शहर वोरोनिश आज एक अजीब से द्वंद्व में जी रहा है। यह शहर भौगोलिक रूप से रूसी राजधानी की तुलना में यूक्रेन के फ्रंटलाइन के अधिक करीब है। यहाँ के शॉपिंग मॉल्स में अब केवल उपभोक्ता सामान ही नहीं, बल्कि युद्ध के हथियार भी कौतूहल का विषय हैं।
देशभक्ति और बारूद की गूँज
हाल ही में एक स्थानीय शॉपिंग सेंटर में 19 वर्षीय सेना ऑपरेटर 'शामन' (छद्म नाम) को ग्राहकों को ड्रोन दिखाते हुए देखा गया। चेहरे पर बालाक्लावा (नकाब) पहने इस युवक की आँखों में भविष्य का निश्चय है। वह जल्द ही फ्रंटलाइन पर जाने वाला है। शामन कहता है, "हर कोई अपना रास्ता खुद चुनता है। मैं एक देशभक्त हूँ और अपने देश की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है।"
पिछले चार वर्षों में रूस में 'देशभक्ति' शब्द के मायने बदल गए हैं। अब यह शब्द केवल भावना नहीं, बल्कि एक राजनीतिक पहचान बन चुका है जो पुतिन के सैन्य अभियान का समर्थन करने वालों को एक सूत्र में पिरोता है।
बदलता शहर: कला बनाम प्रोपेगेंडा
फरवरी 2022 के बाद से वोरोनिश की सूरत पूरी तरह बदल चुकी है:
सैन्य घेराबंदी: उपनगरों की ओर जाने वाली बर्फीली सड़कों पर अब छलावरण (camouflage) नेट के पीछे छिपी विमान भेदी प्रणालियाँ (Anti-aircraft systems) तैनात हैं।
दीवारों की दास्तां: शहर के केंद्र में बने भित्ति चित्र (murals) उन सैनिकों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं जिन्होंने युद्ध के मैदान में जान गंवाई।
विज्ञापनों का युद्ध: स्थानीय थिएटर के 'हंस झील' (Swan Lake) जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पोस्टर अब सेना में भर्ती के बड़े-बड़े विज्ञापनों के नीचे दब गए हैं।
मुआवजे का लालच और अपनों को खोने का दर्द
रूस ने सैनिकों की कमी को पूरा करने के लिए भारी भरकम नकद प्रोत्साहन का सहारा लिया है। एक भर्ती केंद्र नए सैनिकों को 25 लाख रूबल ($32,500) की एकमुश्त राशि की पेशकश कर रहा है, जो क्षेत्र के औसत वेतन के तीन साल के बराबर है।
लेकिन इस धन राशि के पीछे एक गहरा सन्नाटा भी है। 64 वर्षीय ल्यूडमिला की आँखें पथरा गई हैं। उनका बेटा पिछले चार महीनों से लापता है। वह कहती हैं, "यह बहुत कठिन है। मेरे पास केवल उम्मीद बची है, क्योंकि बिना उम्मीद के..." वह अपनी बात पूरी नहीं कर पातीं। बीबीसी और मीडियाज़ोना के आंकड़ों के अनुसार, अब तक कम से कम 1,68,000 रूसी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं।
"शांति" की छटपटाहट
शहर में जहाँ एक ओर युद्ध का उन्माद है, वहीं दूसरी ओर शांति की दबी हुई पुकार भी है। 28 वर्षीय कलाकार 'नोइ' (Mikhail) ने शहर की दीवारों पर मिट्टी की छोटी तख्तियां लगाई थीं, जिन पर सोवियत काल के नारे 'शांति' और 'मित्रता' लिखे थे।
"मैं लोगों को यह याद दिलाना चाहता था कि हमारे दादा-दादी हमेशा कहते थे कि युद्ध भयानक होता है। हमें हमेशा शांति के लिए प्रयास करना चाहिए।" — नोइ, कलाकार
हालाँकि, रूस में युद्ध-विरोधी सक्रियता पर प्रतिबंध के कारण उसकी अधिकांश तख्तियाँ हटा दी गई हैं। विडंबना देखिए, केवल एक तख्ती बची है—जो वोरोनिश की 'पीस स्ट्रीट' (शांति मार्ग) पर स्थित है।