एआई की दुनिया के 'शक्तिशाली पांच': कुछ गुरुओं और संस्थानों की मुट्ठी में है कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य
नई दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' (AI Impact Summit) में जब दुनिया भर के दिग्गज जुटे, तो एक दिलचस्प सच्चाई उभर कर सामने आई। जिस तकनीक को हम 'भविष्य' मान रहे हैं, उसकी डोर दरअसल चंद वैज्ञानिकों, कुछ कमरों और गिने-चुने संस्थानों के बीच सिमटी हुई है।
18 Feb 2026
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नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट नई दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' (AI Impact Summit) में जब दुनिया भर के दिग्गज जुटे, तो एक दिलचस्प सच्चाई उभर कर सामने आई। जिस तकनीक को हम 'भविष्य' मान रहे हैं, उसकी डोर दरअसल चंद वैज्ञानिकों, कुछ कमरों और गिने-चुने संस्थानों के बीच सिमटी हुई है।
ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, एंथ्रोपिक के डेरियो अमोदेई और एआई के 'गॉडफादर' माने जाने वाले यान लेकन की समिट में मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि एआई का पूरा साम्राज्य एक बेहद करीबी और अंतर्संबंधित नेटवर्क पर टिका है।
1. तीन संस्थान और पाँच दिग्गज
पिछले 15 वर्षों में एआई के क्षेत्र में हुई लगभग हर बड़ी सफलता का सीधा संबंध तीन संस्थानों से है:
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT)
यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो
विशेषज्ञों का कहना है कि आज का एआई परिदृश्य 2002 के 'पेपाल माफिया' (PayPal Mafia) की याद दिलाता है, जहाँ पेपाल से निकले लोगों ने टेस्ला, यूट्यूब और लिंक्डइन जैसी कंपनियाँ बनाईं। ठीक वैसे ही, आज गूगल डीपमाइंड और ओपनएआई 'फाउंडर फैक्ट्री' बन चुके हैं।
2. गुरु-शिष्य परंपरा: हिंटन, लेकन और बेंगियो
एआई की वैचारिक नींव जेफ्री हिंटन, यान लेकन और योशुआ बेंगियो ने रखी, जिन्हें 2018 में 'ट्यूरिंग अवार्ड' से सम्मानित किया गया था।
इल्या सुतस्केवर (ओपनएआई के सह-संस्थापक) हिंटन के छात्र रहे हैं।
यान लेकन ने खुद हिंटन के मार्गदर्शन में शोध किया।
एंड्रयू एनजी, जिन्होंने गूगल ब्रेन की स्थापना की, उन्होंने सैम ऑल्टमैन को स्टैनफोर्ड में पढ़ाया और इल्या सुतस्केवर के मेंटर रहे।
3. 'गूगल' से शुरू हुआ आधुनिक एआई का सफर
आज के सभी 'लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स' (LLMs) का आधार गूगल का 2017 का शोध पत्र 'Attention Is All You Need' है। इस पेपर को लिखने वाले आठ शोधकर्ताओं ने ही उस 'ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर' को जन्म दिया, जिस पर आज ChatGPT और अन्य एआई टूल काम कर रहे हैं।
तथ्य: गूगल डीपमाइंड से निकले 200 से अधिक पूर्व कर्मचारियों ने अपनी स्टार्टअप कंपनियाँ शुरू की हैं, जबकि ओपनएआई इस मामले में दूसरे नंबर पर है।
4. निवेश का चक्र: क्या यह एक 'बबल' है?
एआई की फंडिंग का तरीका भी काफी पेचीदा है। माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया, गूगल और अमेज़न जैसी बड़ी कंपनियाँ ही इन स्टार्टअप्स में अरबों डॉलर लगा रही हैं।
सॉफ्टबैंक ने 2025 में ओपनएआई में 40 अरब डॉलर का भारी निवेश किया।
उद्योग जगत में अब 'सर्कुलर ट्रेडिंग' (Circular Trading) जैसे शब्द गूँज रहे हैं, जो इस क्षेत्र में एक संभावित आर्थिक बुलबुले (Bubble) की ओर इशारा करते हैं।
5. मिशन: सुरक्षा बनाम विस्तार
जैसे-जैसे यह नेटवर्क फैल रहा है, वैचारिक मतभेद भी उभर रहे हैं। डेरियो अमोदेई ने एआई सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए ओपनएआई छोड़ एंथ्रोपिक बनाई, जबकि इल्या सुतस्केवर ने 'सेफ सुपरइंटेलिजेंस' की नींव रखी। हाल ही में मीरा मुराती ने भी 'थिंकिंग मशीन्स लैब' (फरवरी 2025) की शुरुआत की है।
निष्कर्ष: एआई का भविष्य भले ही वैश्विक हो, लेकिन इसका नियंत्रण आज भी उन्हीं चंद लोगों के हाथ में है जिन्होंने एक दशक पहले एक ही लैब में साथ बैठकर कोडिंग सीखी थी।