माता वैष्णो देवी रोपवे पर रार: कटरा में 'सांकेतिक बंद', 4.5 लाख लोगों की आजीविका पर संकट का दावा

माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाने वाले आधार शिविर कटरा में आज सन्नाटा पसरा रहा। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा प्रस्तावित रोपवे परियोजना के खिलाफ स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं ने एक दिवसीय 'सांकेतिक बंद' का आह्वान किया। बाजारों में दुकानें बंद रहीं और होटलों के बाहर 'नो रोपवे' (No Ropeway) के पोस्टर चस्पा नजर आए।

18 Feb 2026  |  34

कटरा |  माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाने वाले आधार शिविर कटरा में आज सन्नाटा पसरा रहा। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा प्रस्तावित रोपवे परियोजना के खिलाफ स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं ने एक दिवसीय 'सांकेतिक बंद' का आह्वान किया। बाजारों में दुकानें बंद रहीं और होटलों के बाहर 'नो रोपवे' के पोस्टर चस्पा नजर आए।

आजीविका बनाम आधुनिकता: क्या है मुख्य विवाद?

स्थानीय लोगों का विरोध मुख्य रूप से रोजगार छिनने के डर पर आधारित है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस परियोजना से करीब 4.5 लाख लोगों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर प्रभावित होगी:

सेवा प्रदाता: मार्ग पर सक्रिय करीब 4,000 घोड़े वाले, 12,000 पिट्ठू और पालकी सेवा से जुड़े लोगों का काम ठप होने की आशंका है।

व्यापारी: दर्शनी ड्योढ़ी से भवन के बीच स्थित लगभग 7,500 दुकानों और उनमें काम करने वाले हजारों कर्मचारियों के भविष्य पर तलवार लटक रही है।

होटल उद्योग: कटरा के 750 होटल और 150 धर्मशालाएं भी इस यात्रा ढांचे पर निर्भर हैं।

धार्मिक परंपरा के उल्लंघन का तर्क

विरोध कर रहे स्थानीय हितधारकों का तर्क है कि रोपवे लगने से यात्रा का पारंपरिक धार्मिक क्रम प्रभावित होगा। उनके अनुसार, श्रद्धालु सदियों से दर्शनी ड्योढ़ी और चरण पादुका जैसे पवित्र पड़ावों से होकर गुजरते हैं। रोपवे शुरू होने से ये मुख्य पड़ाव 'बाईपास' हो जाएंगे, जिससे यात्रा की पारंपरिक और आध्यात्मिक भावना कमजोर पड़ेगी।

श्राइन बोर्ड का पक्ष: श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोपरि

दूसरी ओर, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का मानना है कि यह परियोजना समय की मांग है:

बढ़ती भीड़: हर साल आने वाले 80 से 90 लाख श्रद्धालुओं के प्रबंधन के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा जरूरी है।

दिव्यांग और बुजुर्ग: रोपवे से उन यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी जो शारीरिक अक्षमता के कारण पैदल या घोड़ों पर यात्रा नहीं कर सकते।

पुनर्वास का वादा: बोर्ड ने आश्वासन दिया है कि घोड़े-पिट्ठू वालों का चरणबद्ध तरीके से पुनर्वास किया जाएगा, जिसके बाद ही काम आगे बढ़ेगा।

"वर्ष 2024 में भी 18 दिनों तक चले कड़े विरोध के बाद इस परियोजना को टालना पड़ा था। अब एक बार फिर स्थानीय लोग और बोर्ड आमने-सामने हैं।"

आगे की राह

फिलहाल कटरा के इस बंद ने प्रशासन और श्राइन बोर्ड पर दबाव बढ़ा दिया है। अब सभी की निगाहें गठित कमेटी की रिपोर्ट और बोर्ड के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या बोर्ड स्थानीय लोगों को भरोसे में लेकर इस 'महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट' को पूरा कर पाएगा, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

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