ईरान पर हमले की तैयारी में अमेरिका, ट्रम्प इस सप्ताहांत ले सकते हैं बड़ा फैसला

मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में युद्ध के बादल गहराने लगे हैं। नवीनतम रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ईरान पर हमले के लिए पूरी तरह तैयार है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस सप्ताहांत तक सैन्य कार्रवाई पर अंतिम मुहर लगा सकते हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक आधिकारिक तौर पर 'सशस्त्र संघर्ष' (Armed Confrontation) का आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन युद्ध स्तर पर सैन्य जमावड़ा किसी बड़े हमले की ओर इशारा कर रहा है।

19 Feb 2026  |  31

वाशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में युद्ध के बादल गहराने लगे हैं। नवीनतम रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ईरान पर हमले के लिए पूरी तरह तैयार है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस सप्ताहांत तक सैन्य कार्रवाई पर अंतिम मुहर लगा सकते हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक आधिकारिक तौर पर 'सशस्त्र संघर्ष' (Armed Confrontation) का आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन युद्ध स्तर पर सैन्य जमावड़ा किसी बड़े हमले की ओर इशारा कर रहा है।

मिडल ईस्ट बना 'किलाबंदी': तैनात हुए दो विमानवाहक पोत

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में वाशिंगटन की सैन्य शक्ति इस समय चरम पर है:

नौसैनिक ताकत: वर्तमान में 13 युद्धपोत तैनात हैं, जिनमें विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन, 9 विध्वंसक (Destroyers) और 3 तटीय लड़ाकू जहाज शामिल हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा पोत रवाना: राष्ट्रपति ट्रम्प के आदेश पर दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत, USS जेराल्ड आर. फोर्ड, तीन विध्वंसकों के साथ अटलांटिक महासागर से मिडल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है।

वायु सेना की मुस्तैदी: आसमान में F-22 रैप्टर स्टील्थ फाइटर जेट्स, F-15 और F-16 वारप्लेन के साथ-साथ ईंधन भरने वाले KC-135 विमानों का बड़ा बेड़ा तैनात किया गया है।

हमले की ओर ले जाने वाले 6 प्रमुख कारक

विश्लेषकों और खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये छह वजहें ट्रम्प को 'बटन दबाने' के लिए प्रेरित कर सकती हैं:

परमाणु समझौता (Nuke Deal): जिनेवा में हालिया बातचीत के बावजूद, व्हाइट हाउस का कहना है कि दोनों पक्ष अभी भी बहुत दूर हैं। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने चेतावनी दी है कि ईरान के लिए समझौता करना ही बुद्धिमानी होगी।

ईरान में जन-आक्रोश: ईरान में घरेलू स्तर पर सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। ट्रम्प ने पहले भी चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों को मारा गया, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करेगा।

'चेखव का विमानवाहक पोत': युद्ध का सिद्धांत कहता है कि यदि आपने मंच पर हथियार दिखाया है, तो उसका उपयोग तय है। दो-दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स की तैनाती एक स्पष्ट संकेत है।

इजरायली दबाव: बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रम्प ईरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव बनाने के लिए लगातार समन्वय कर रहे हैं।

तेल बाजार की स्थिति: वर्तमान में वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति पर्याप्त है और कीमतें कम हैं। रणनीतिकारों का मानना है कि यदि इस समय ईरान के निर्यात बाधित भी होते हैं, तो दुनिया पर इसका असर सीमित होगा।

ईरानी शासन की कमजोरी: पिछले साल हुए इजरायली हमलों और आंतरिक विद्रोह के कारण खामेनेई शासन कमजोर हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान की जवाबी कार्रवाई अब पहले के मुकाबले सीमित होगी।

अंतिम निर्णय का इंतजार

CNN और CBS की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प निजी तौर पर सलाहकारों से चर्चा कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि "वह इस पर विचार करने में काफी समय बिता रहे हैं।" यदि वार्ता विफल होती है और कोई नया परमाणु समझौता नहीं होता, तो अमेरिका सीधे तौर पर ईरान के परमाणु ठिकानों या शासन से जुड़े संस्थानों को निशाना बना सकता है।

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