रूसी तेल पर 'रणनीतिक स्वायत्तता': रूस ने खारिज किए अमेरिकी दावे, कहा- "भारत ने नहीं बदला अपना रुख"

रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को उन अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि भारत ने रूसी कच्चे तेल के आयात को रोकने का फैसला किया है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने साप्ताहिक ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि उनके पास ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत ने अपनी ऊर्जा नीति में कोई बदलाव किया है।

19 Feb 2026  |  25

मॉस्को/नई दिल्ली: रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को उन अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि भारत ने रूसी कच्चे तेल के आयात को रोकने का फैसला किया है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने साप्ताहिक ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि उनके पास ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत ने अपनी ऊर्जा नीति में कोई बदलाव किया है।

रूस का पलटवार: "किसी को डिक्टेट करने का हक नहीं"

मारिया ज़खारोवा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयानों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा:

"स्वतंत्र राष्ट्रों को क्या करना चाहिए, यह डिक्टेट करने का अधिकार अमेरिका ने खुद ही ले लिया है। भारत का रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।"

रूस का यह बयान उस समय आया है जब हाल ही में अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। वाशिंगटन का दावा है कि यह कटौती भारत के उस "वादे" के बदले की गई है जिसमें उसने रूसी तेल आयात बंद करने की बात कही थी।

आंकड़ों की हकीकत: क्या वाकई कम हो रहा है रूसी तेल?

भले ही रूस अमेरिकी दावों को नकार रहा हो, लेकिन व्यापारिक आंकड़े एक अलग कहानी बयां कर रहे हैं। जनवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार:

न्यूनतम स्तर पर आयात: भारत का रूसी तेल आयात पिछले दो वर्षों के सबसे निचले स्तर 21.2% पर आ गया है (जो कभी 40% के करीब था)।

सऊदी अरब की वापसी: सऊदी अरब एक बार फिर भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है।

मिडल ईस्ट का बढ़ता दबदबा: जनवरी में भारत की कुल तेल आपूर्ति में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी बढ़कर 55% हो गई है।

रिफाइनरियों का रुख: रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े रिफाइनर्स ने हाल के हफ्तों में रूसी कार्गो की बुकिंग में भारी कमी की है।

भारत की 'चुप्पी' के मायने

दिलचस्प बात यह है कि भारत सरकार ने अमेरिकी दावों पर अभी तक न तो पुष्टि की है और न ही खंडन। विदेश मंत्रालय (MEA) ने केवल इतना दोहराया है कि भारत के "राष्ट्रीय हित" ही ऊर्जा खरीद के फैसलों का आधार होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत "रणनीतिक स्वायत्तता" (Strategic Autonomy) की नीति पर चलते हुए धीरे-धीरे अपने स्रोतों को डाइवर्सिफाई कर रहा है ताकि अमेरिका के साथ व्यापारिक हितों और रूस के साथ कूटनीतिक संबंधों के बीच संतुलन बना रहे।

भविष्य की राह: अमेरिका बनाम रूस

अमेरिका अब भारत को वेनेजुएला और अपने स्वयं के ऊर्जा संसाधनों से तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। दूसरी ओर, रूस भारत के साथ एक बड़ा 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' (EAEU के माध्यम से) फाइनल करने की ओर बढ़ रहा है, ताकि ऊर्जा के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी व्यापार को मजबूती दी जा सके।

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