'हेनरी' की कस्टडी पर छिड़ी कानूनी जंग: ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचीं महुआ मोइत्रा
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा और वकील जय अनंत देहाद्राई के बीच चल रहा विवाद अब उनके पालतू रॉटवाइलर, 'हेनरी' को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट की दहलीज तक जा पहुँचा है। गुरुवार को महुआ मोइत्रा ने साकेत कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उन्हें हेनरी की अंतरिम कस्टडी देने से इनकार कर दिया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए जय अनंत देहाद्राई को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को तय की है।
19 Feb 2026
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नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा और वकील जय अनंत देहाद्राई के बीच चल रहा विवाद अब उनके पालतू रॉटवाइलर, 'हेनरी' को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट की दहलीज तक जा पहुँचा है। गुरुवार को महुआ मोइत्रा ने साकेत कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उन्हें हेनरी की अंतरिम कस्टडी देने से इनकार कर दिया गया था।
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए जय अनंत देहाद्राई को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को तय की है।
"उपहार में मिला था हेनरी" – मोइत्रा का तर्क
महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट के फैसले को त्रुटिपूर्ण बताया है। उनके मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
देखभाल और लगाव: मोइत्रा का कहना है कि हेनरी उन्हें 'प्यार और देखभाल' के लिए उपहार स्वरूप दिया गया था और वह मुख्य रूप से उन्हीं के आवास पर रहता था।
अस्थाई व्यवस्था: याचिका में स्पष्ट किया गया कि केवल चुनावी दौरों या दिल्ली से बाहर होने की स्थिति में ही हेनरी को देहाद्राई के पास छोड़ा जाता था।
मालिकाना हक का विवाद: उन्होंने तर्क दिया कि केवल भुगतान (पेमेंट) करना मालिकाना हक का प्रमाण नहीं हो सकता। ट्रायल कोर्ट ने यह मानने में गलती की कि देहाद्राई मालिक हैं, जबकि हेनरी पर प्राथमिक अधिकार मोइत्रा का है।
अदालत में देहाद्राई का विरोध
सुनवाई के दौरान जय अनंत देहाद्राई स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने मोइत्रा की याचिका का कड़ा विरोध करते हुए इसे तुरंत खारिज करने की मांग की। गौरतलब है कि पिछले साल 10 नवंबर को साकेत कोर्ट ने मोइत्रा की उस अर्जी को ठुकरा दिया था, जिसमें उन्होंने हर महीने 10 दिनों के लिए हेनरी की कस्टडी मांगी थी।
राजनीतिक और कानूनी विवादों की पृष्ठभूमि
हेनरी को लेकर चल रही यह कानूनी लड़ाई दोनों पक्षों के बीच जारी एक बड़े विवाद का हिस्सा है:
कैश फॉर क्वेरी विवाद: जय अनंत देहाद्राई ने ही सबसे पहले आरोप लगाया था कि महुआ मोइत्रा ने व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी से संसद में सवाल पूछने के बदले रिश्वत ली थी।
सांसदी जाना: इन्हीं आरोपों के आधार पर लोकसभा आचार समिति की सिफारिश के बाद 8 दिसंबर 2023 को महुआ मोइत्रा को सदन से निष्कासित कर दिया गया था।
मानहानि का मामला: मोइत्रा ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए देहाद्राई और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ मानहानि का केस भी किया हुआ है।
जहाँ एक ओर राजनीतिक गलियारों में 'कैश फॉर क्वेरी' की चर्चा गर्म है, वहीं अब अदालत के गलियारों में बेजुबान 'हेनरी' के भविष्य पर सबकी नजरें टिकी हैं।