क्या है 'रेयर अर्थ पर्मानेंट मैग्नेट' योजना, 4 राज्यों में बनेंगे 'क्रिटिकल मिनरल पार्क्स'

भारत के लिए रक्षा, एयरोस्पेस और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी सफलता मिलने वाली है। केंद्रीय खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने गुरुवार (19 फरवरी 2026) को घोषणा की है कि भारत इस साल के अंत तक रेयर अर्थ पर्मानेंट मैग्नेट (REPM) का घरेलू उत्पादन शुरू कर देगा। चीन के एकाधिकार (90% प्रोसेसिंग पर नियंत्रण) को चुनौती देने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में यह भारत का अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी कदम है।

19 Feb 2026  |  21

भारत के लिए रक्षा, एयरोस्पेस और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी सफलता मिलने वाली है। केंद्रीय खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने गुरुवार (19 फरवरी 2026) को घोषणा की है कि भारत इस साल के अंत तक रेयर अर्थ पर्मानेंट मैग्नेट (REPM) का घरेलू उत्पादन शुरू कर देगा।

चीन के एकाधिकार (90% प्रोसेसिंग पर नियंत्रण) को चुनौती देने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में यह भारत का अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी कदम है।

क्या है 'रेयर अर्थ पर्मानेंट मैग्नेट' योजना?

भारत सरकार ने नवंबर 2025 में इस क्षेत्र के लिए 7,280 करोड़ रुपये (लगभग 73 अरब रुपये) के विशेष प्रोत्साहन कार्यक्रम को मंजूरी दी थी। इस योजना के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

उत्पादन लक्ष्य: भारत का लक्ष्य सालाना 6,000 मीट्रिक टन (MTPA) स्थायी चुंबकों का निर्माण करना है।

प्रोत्साहन राशि: इसमें 6,450 करोड़ रुपये बिक्री से जुड़े प्रोत्साहन (Incentives) और 750 करोड़ रुपये पूंजीगत सहायता (Capital Subsidy) के रूप में दिए जाएंगे।

निजी भागीदारी: सरकार यह कार्य निजी कंपनियों के साथ मिलकर करेगी। इसके लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली (Global Competitive Bidding) के जरिए पांच लाभार्थियों का चयन किया जाएगा।

स्वदेशी तकनीक: खनन मंत्रालय और एक सरकारी संस्था ने इन चुंबकों को बनाने के लिए पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक विकसित कर ली है।

4 राज्यों में बनेंगे 'क्रिटिकल मिनरल पार्क्स'

देश में दुर्लभ खनिजों की प्रोसेसिंग को गति देने के लिए चार राज्यों में विशेष संयंत्र (Processing Plants) लगाने की योजना है:

ओडिशा

आंध्र प्रदेश

महाराष्ट्र

गुजरात (यहाँ काम पहले ही शुरू हो चुका है)।

इन पार्क्स का उद्देश्य खनन से लेकर तैयार चुंबक (Raw Ore to Finished Magnet) तक की पूरी वैल्यू चेन को भारत में ही स्थापित करना है।

भारत: दुर्लभ धातुओं का तीसरा सबसे बड़ा खजाना

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के आंकड़ों के अनुसार, भारत इस क्षेत्र में एक सोता हुआ शेर है:

विवरणसांख्यिकी/रैंक
कुल भंडार6.9 मिलियन टन
वैश्विक रैंक (भंडार में)तीसरा (चीन और ब्राजील के बाद)
वर्तमान वैश्विक उत्पादन में हिस्सेदारी1% से भी कम
भविष्य की मांग (2030 तक)वर्तमान से दोगुनी होने की उम्मीद

चीन पर निर्भरता खत्म करने की चुनौती

वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का 80% से 90% हिस्सा आयात करता है, जिसमें चीन का दबदबा है। पिछले साल चीन द्वारा सप्लाई चेन पर प्रतिबंध लगाने के बाद, भारत ने 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत अपनी रणनीति को और तेज कर दिया है। ये चुंबक न केवल स्मार्टफोन और कंप्यूटर हार्ड ड्राइव के लिए, बल्कि मिसाइल गाइडेंस सिस्टम और लड़ाकू विमानों (जैसे F-35) के लिए भी अनिवार्य हैं।

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