योगी सरकार का 'होली गिफ्ट': शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में भारी बढ़ोतरी, अब मिलेंगे ₹18,000
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को होली का बड़ा तोहफा देते हुए उनके मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि की घोषणा की है। शुक्रवार को विधानसभा के बजट सत्र (2026-27) के समापन संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अप्रैल माह से शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को लगभग दोगुना मानदेय दिया जाएगा।
20 Feb 2026
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लखनऊ | उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को होली का बड़ा तोहफा देते हुए उनके मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि की घोषणा की है। शुक्रवार को विधानसभा के बजट सत्र (2026-27) के समापन संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अप्रैल माह से शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को लगभग दोगुना मानदेय दिया जाएगा।
मानदेय में बड़ी वृद्धि: एक नजर में
मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, मानदेय की नई दरें अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी। इसके अलावा, इन कर्मियों को ₹5 लाख तक के कैशलेस इलाज की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
| पद | वर्तमान मानदेय | नया मानदेय (अप्रैल से) |
|---|---|---|
| शिक्षामित्र | ₹10,000 | ₹18,000 |
| अनुदेशक | ₹9,000 | ₹17,000 |
शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव और इंफ्रास्ट्रक्चर
सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के समय ड्रॉप-आउट रेट (स्कूल छोड़ने की दर) लगभग 6% थी, जिसे वर्तमान सरकार 0.3% पर ले आई है। शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए सरकार ने निम्नलिखित बड़े कदम उठाए हैं:
सीएम कंपोजिट विद्यालय: हर न्याय पंचायत स्तर तक 12वीं तक की शिक्षा और कौशल विकास के लिए ₹2,382 करोड़ का प्रावधान।
कस्तूरबा विद्यालय: विकास खंडों में इनके सुदृढ़ीकरण के लिए ₹580 करोड़ आवंटित।
स्कूटी योजना: 'रानी लक्ष्मीबाई योजना' के तहत उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही बेटियों के लिए ₹400 करोड़ का बजट, जिससे उन्हें स्कूटी दी जाएगी।
यूनिवर्सिटी नेटवर्क: अलीगढ़, मिर्जापुर, आजमगढ़ जैसी कमिश्नरियों में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना।
'जाति नहीं, योग्यता का सम्मान'
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें शिक्षामित्रों को केवल ₹3,000 देती थीं, जिसे हमने बढ़ाकर ₹18,000 किया है। राजनीति में बढ़ते जातिवाद पर प्रहार करते हुए उन्होंने राष्ट्रकवि दिनकर की पंक्तियों के माध्यम से कड़ा संदेश दिया:
"पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर, > जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर।"
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार योजनाओं का लाभ देने में किसी की जाति, मत या मजहब नहीं देखती। उन्होंने बचपन का एक संस्मरण साझा करते हुए बताया कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और यूनिफॉर्म की व्यवस्था ने ही गरीब बच्चों के मन में शिक्षा के प्रति विश्वास जगाया है।