सावधान! AI और डीपफेक कंटेंट पर सरकार सख्त: नए IT नियम लागू, नियमों की अनदेखी पड़ सकती है भारी
भारत सरकार ने देश के डिजिटल परिदृश्य को सुरक्षित बनाने के लिए इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) अमेंडमेंट रूल्स, 2026 को हरी झंडी दे दी है। संयुक्त सचिव अजीत कुमार द्वारा हस्ताक्षरित यह गजट नोटिफिकेशन 20 फरवरी, 2026 से प्रभावी हो गया है। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य AI द्वारा जनरेटेड 'सिंथेटिक कंटेंट' और 'डीपफेक' पर नकेल कसना है।
20 Feb 2026
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नई दिल्ली | भारत सरकार ने देश के डिजिटल परिदृश्य को सुरक्षित बनाने के लिए इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) अमेंडमेंट रूल्स, 2026 को हरी झंडी दे दी है। संयुक्त सचिव अजीत कुमार द्वारा हस्ताक्षरित यह गजट नोटिफिकेशन 20 फरवरी, 2026 से प्रभावी हो गया है। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य AI द्वारा जनरेटेड 'सिंथेटिक कंटेंट' और 'डीपफेक' पर नकेल कसना है।
नियमों की 5 बड़ी बातें: जो आपके लिए जानना जरूरी है
अनिवार्य लेबलिंग और मेटाडेटा: अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब) को AI से बनी किसी भी जानकारी (SGI - सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन) को स्पष्ट रूप से लेबल करना होगा। इसमें 'यूनिक आइडेंटिफायर' एम्बेड किए जाएंगे ताकि कंटेंट के असली स्रोत (Origin) का पता लगाया जा सके। एक बार लेबल लगने के बाद उसे हटाया या छिपाया नहीं जा सकेगा।
सेल्फ-डिक्लेरेशन और ऑटोमेटेड चेकिंग: कंटेंट अपलोड करने से पहले प्लेटफॉर्म को यूजर से पूछना होगा—"क्या यह AI से बना है?" इसके अलावा, प्लेटफॉर्म्स को खुद भी ऑटोमेटेड टूल्स का इस्तेमाल करना होगा ताकि वे संदिग्ध कंटेंट को लाइव होने से पहले ही पहचान सकें।
कड़ी कार्रवाई: 36 नहीं, अब सिर्फ 3 घंटे: सरकार ने कार्रवाई की समयसीमा (Response Window) में भारी कटौती की है। अब कानूनी आदेश मिलने पर प्लेटफॉर्म्स को विवादित कंटेंट हटाने के लिए 36 घंटे के बजाय सिर्फ 3 घंटे का समय मिलेगा। इसी तरह, 15 दिन वाली विंडो को घटाकर 7 दिन कर दिया गया है।
वॉटरमार्क नियम में ढील: अक्टूबर 2025 के ड्राफ्ट में AI विजुअल्स पर 10% स्क्रीन स्पेस पर वॉटरमार्क की शर्त थी, जिसे गूगल और मेटा जैसे दिग्गजों के विरोध के बाद हटा दिया गया है। अब लेबलिंग अनिवार्य है, लेकिन फिक्स्ड-साइज वॉटरमार्क की जरूरत नहीं है।
अपराध की श्रेणी और जुर्माना: डीपफेक या AI का उपयोग करके बनाया गया अश्लील कंटेंट, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा मटीरियल (CSAM), या किसी व्यक्ति की आवाज/पहचान का गलत इस्तेमाल अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO एक्ट के तहत गंभीर अपराध माना जाएगा।
किसे मिलेगी छूट और किसे मिलेगी चेतावनी?
किसे छूट: रूटीन एडिटिंग जैसे—कलर करेक्शन, नॉइज रिडक्शन, ट्रांसलेशन या रिसर्च पेपर और काल्पनिक ड्राफ्ट (PDF/PPT) को इन सख्त नियमों से बाहर रखा गया है, बशर्ते वे मूल अर्थ को न बदलें।
प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी: सोशल मीडिया कंपनियों को हर 3 महीने में कम से कम एक बार अपने यूजर्स को (अंग्रेजी या क्षेत्रीय भाषाओं में) AI के गलत इस्तेमाल पर होने वाली कानूनी कार्रवाई और जुर्माने के प्रति सचेत करना होगा।
महत्वपूर्ण नोट: सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म इन नियमों के उल्लंघन में शामिल पाया जाता है, तो उसे IT एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाला 'सेफ हार्बर' (कानूनी सुरक्षा कवच) नहीं मिलेगा। यानी, यूजर के पोस्ट के लिए प्लेटफॉर्म भी सीधे तौर पर जिम्मेदार हो सकता है।
क्या आप चाहते हैं कि मैं इन नियमों का उल्लंघन करने पर होने वाली कानूनी धाराओं (जैसे BNS या POCSO) की एक विस्तृत सूची तैयार करूँ?