कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग: अमेरिका-ईरान तनाव से 6 महीने के उच्च स्तर पर भाव, ट्रंप के अल्टीमेटम ने बढ़ाई चिंता
मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच तल्ख होते रिश्तों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले छह महीनों के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई हैं। इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड में लगभग 6% और अमेरिकी तेल (WTI) में 5% से ज्यादा की भारी तेजी दर्ज की गई है।
20 Feb 2026
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नई दिल्ली/न्यूयॉर्क | मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच तल्ख होते रिश्तों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले छह महीनों के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई हैं। इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड में लगभग 6% और अमेरिकी तेल (WTI) में 5% से ज्यादा की भारी तेजी दर्ज की गई है।
बाजार का वर्तमान हाल: MCX और ग्लोबल रेट्स
20 फरवरी 2026 को बाजार की स्थिति कुछ इस प्रकार रही:
कीमतें बढ़ने के 3 मुख्य कारण
1. ट्रंप का अल्टीमेटम और सैन्य हलचल: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को परमाणु समझौते पर बातचीत के लिए दिया गया 10-15 दिनों का अल्टीमेटम तनाव की मुख्य वजह है। इसके साथ ही मध्य-पूर्व में अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी ने लंबी अवधि के टकराव की आशंका को जन्म दे दिया है।
2. स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में नौसैनिक अभ्यास: ईरान और रूस द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज' (Strait of Hormuz) में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास ने निवेशकों को डरा दिया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा कवर करता है। यहाँ किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक सप्लाई चेन को ठप कर सकती है।
3. रूस-यूक्रेन वार्ता में गतिरोध: रूस-यूक्रेन शांति वार्ता में आ रही रुकावटों ने भी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिससे बाजार में 'रिस्क प्रीमियम' बढ़ गया है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स और तकनीकी संकेत?
सैमको (SAMCO) सिक्योरिटीज के विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में फिलहाल 'तेजी' (Bullish) का रुख है:
WTI क्रूड: $55 के स्तर से शानदार रिकवरी के बाद अब यह $72-$73 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
MCX (भारतीय बाजार): घरेलू बाजार में ₹6,000 एक मजबूत सपोर्ट (Support) के रूप में उभरा है, जबकि ₹6,300 पर अगला बड़ा रेजिस्टेंस (Resistance) देखा जा रहा है।
स्टॉक अपडेट: अमेरिका और चीन में कच्चे तेल के भंडार (Stockpiles) में आई कमी ने भी कीमतों को सहारा दिया है, जिससे ओपेक+ (OPEC+) की उत्पादन बढ़ाने की योजना के बावजूद बाजार में 'टाइट सप्लाई' की स्थिति बनी हुई है।
निष्कर्ष: जब तक मध्य-पूर्व में कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और तेजी जारी रहने की संभावना है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।