ट्रंप को तगड़ा झटका: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने वैश्विक टैरिफ को बताया ‘अवैध’, भारतीय बाजार में जश्न का माहौल

| अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति और मनमाने टैरिफ फैसलों पर वहां की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा प्रहार किया है। शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले से न केवल ट्रंप के मंसूबों पर पानी फिर गया है, बल्कि भारतीय निर्यातकों और शेयर बाजार के लिए भी 'बल्ले-बल्ले' वाली स्थिति पैदा हो गई है।

21 Feb 2026  |  15

वॉशिंगटन/नई दिल्ली | अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति और मनमाने टैरिफ फैसलों पर वहां की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा प्रहार किया है। शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले से न केवल ट्रंप के मंसूबों पर पानी फिर गया है, बल्कि भारतीय निर्यातकों और शेयर बाजार के लिए भी 'बल्ले-बल्ले' वाली स्थिति पैदा हो गई है।

संविधान सर्वोपरि: 6-3 के बहुमत से फैसला

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अध्यक्षता वाली पीठ ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप द्वारा नियुक्त रिपब्लिकन जजों ने भी संविधान की मर्यादा रखते हुए उनके खिलाफ वोट किया।

कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां:

अधिकार क्षेत्र: टैरिफ लगाने का असली अधिकार अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।

IEEPA का दुरुपयोग: राष्ट्रपति ने 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया। यह शक्तियां केवल आपातकाल के लिए हैं, शांतिकाल में मनमानी के लिए नहीं।

रद्द शुल्क: 'लिबरेशन डे' के नाम पर घोषित 10% वैश्विक टैरिफ और कनाडा, मैक्सिको व चीन पर लगे विशेष शुल्क अब प्रभावी नहीं रहेंगे।

भारतीय बाजार पर असर: सोमवार को दिखेगी 'सुपर तेजी'

विशेषज्ञों का मानना है कि सोमवार को जब भारतीय शेयर बाजार खुलेंगे, तो आईटी और फार्मा सेक्टर में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।

सेक्टरसंभावित प्रभावप्रमुख कंपनियाँ
IT सेक्टरअमेरिकी कंपनियों का आईटी बजट बढ़ेगा, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर खर्च बढ़ेगा।TCS, Infosys, HCLTech
फार्माजेनेरिक दवाओं पर टैरिफ हटने से मार्जिन में सुधार होगा।Sun Pharma, Dr. Reddy’s, Cipla
टेक्सटाइलभारतीय कपड़े अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहेंगे।निर्यात वॉल्यूम में वृद्धि
ऑटोऑटो कंपोनेंट्स की मांग में बढ़ोत्तरी की संभावना।भारत-US व्यापार में मजबूती

रुपये की मजबूती: वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका कम होने से विदेशी निवेशक (FIIs) भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश बढ़ा सकते हैं, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होगा।

विशेषज्ञों की राय: "यह असली लोकतंत्र की जीत है"

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हेमंत कुमार झा ने कहा, "डोनाल्ड ट्रंप अक्सर एक तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहे थे, लेकिन इस फैसले ने साबित कर दिया कि अमेरिका में असली शक्ति उसके संविधान में निहित है।"

वहीं, अमेरिका में बसे वैज्ञानिक प्रो. महेंद्र सिंह ने खुशी जताते हुए कहा कि रिपब्लिकन जजों ने अपनी राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर कानून का साथ दिया, जो दुनिया के लिए एक मिसाल है। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा ट्रंप के निर्देशों को ठुकराने का उदाहरण देते हुए अमेरिकी संस्थानों की स्वायत्तता की सराहना की।

ट्रंप की अगली चाल: टकराव के आसार

इस फैसले से तिलमिलाए राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे 'देश के लिए शर्मनाक' बताया है। उन्होंने हार मानने के बजाय सेक्शन 122 के तहत एक नया आदेश लाने की घोषणा की है ताकि 10 प्रतिशत का अतिरिक्त वैश्विक टैरिफ फिर से लगाया जा सके। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अब उनकी हर मनमानी पर न्यायपालिका की कड़ी नजर रहेगी।

बड़ी राहत: भारतीय निर्यातकों को उन 18 प्रतिशत तक के 'रेसीप्रोकल टैरिफ' से मुक्ति मिलेगी जो IEEPA के तहत लगाए गए थे।

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