ट्रंप का 'टैरिफ प्लान': तीन प्रमुख कानूनी स्तंभ
राष्ट्रपति ट्रंप ने मुख्य रूप से तीन अलग-अलग कानूनों के जरिए अपनी व्यापार नीतियों को लागू करने की कोशिश की है। नीचे दी गई तालिका इन तीनों प्रावधानों के अंतर को स्पष्ट करती है:
21 Feb 2026
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राष्ट्रपति ट्रंप ने मुख्य रूप से तीन अलग-अलग कानूनों के जरिए अपनी व्यापार नीतियों को लागू करने की कोशिश की है। नीचे दी गई तालिका इन तीनों प्रावधानों के अंतर को स्पष्ट करती है:
| कानून (Section) | मुख्य आधार | समय सीमा / शर्त | भारत पर प्रभाव (उदाहरण) |
|---|---|---|---|
| सेक्शन 122 (ट्रेड एक्ट 1974) | भुगतान संतुलन (BOP) संकट | केवल 150 दिन (आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस अनिवार्य) | पहली बार इस्तेमाल; सभी देशों पर 10% फ्लैट टैरिफ। |
| सेक्शन 301 (ट्रेड एक्ट 1974) | अनुचित व्यापार व्यवहार | USTR की जांच जरूरी | डिजिटल सर्विस टैक्स (गूगल टैक्स) विवाद। |
| सेक्शन 232 (ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट 1962) | राष्ट्रीय सुरक्षा | वाणिज्य मंत्री की सिफारिश | स्टील और एल्यूमीनियम पर टैरिफ। |
1. सेक्शन 122: 150 दिनों का 'आपातकालीन' विकल्प
यह कानून राष्ट्रपति को सबसे तेज़ शक्ति देता है। यदि अमेरिका को लगता है कि उसका भुगतान संतुलन (Balance of Payments) गंभीर संकट में है, तो राष्ट्रपति बिना किसी लंबी जांच के 15% तक टैरिफ लगा सकते हैं।
पेच क्या है? इसकी सबसे बड़ी सीमा 150 दिन की अवधि है।
कांग्रेस की भूमिका: अगर ट्रंप इसे 150 दिनों के बाद भी जारी रखना चाहते हैं, तो उन्हें अमेरिकी कांग्रेस (संसद) से मंजूरी लेनी होगी। बिना विधायी समर्थन के यह टैरिफ अपने आप खत्म हो जाएगा।
2. सेक्शन 301: 'जैसे को तैसा' की नीति
यह धारा अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को शक्ति देती है कि वह उन देशों की पहचान करें जो अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव कर रहे हैं या बौद्धिक संपदा (IP) की चोरी कर रहे हैं।
भारत के संदर्भ में, डिजिटल सर्विस टैक्स पर इसी के तहत विवाद हुआ था। हालांकि, फिलहाल ट्रंप ने इसके तहत कोई नई जांच शुरू नहीं की है, लेकिन यह उनके तरकश में एक प्रभावी तीर की तरह मौजूद है।
3. सेक्शन 232: राष्ट्रीय सुरक्षा का कवच
यह कानून आर्थिक से ज्यादा सुरक्षात्मक है। इसके तहत दलील दी जाती है कि कुछ चीजों का आयात (जैसे स्टील या ऑटो पार्ट्स) अमेरिकी सेना या अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए खतरा है।
ट्रंप अपने पिछले कार्यकाल में इसी कानून के जरिए स्टील और एल्यूमीनियम पर टैरिफ लगाकर सुर्खियां बटोर चुके हैं।
निष्कर्ष: आगे की राह
सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुरुआती टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद, 10% ग्लोबल टैरिफ लगाकर ट्रंप ने गेंद अब कांग्रेस के पाले में डाल दी है। अगले 150 दिन यह तय करेंगे कि अमेरिका की व्यापारिक दीवार स्थायी होगी या यह सिर्फ एक अल्पकालिक दबाव बनाने की रणनीति है।