धर्मगुरु पर गंभीर आरोप: पॉक्सो कोर्ट का ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR का आदेश

प्रयागराज की एक विशेष अदालत ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ यौन शोषण के मामले में मुकदमा दर्ज करने का बड़ा आदेश दिया है। पॉक्सो (POCSO) स्पेशल कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी पुलिस को इस मामले में एफआईआर दर्ज कर गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं।

21 Feb 2026  |  16

प्रयागराज |  प्रयागराज की एक विशेष अदालत ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ यौन शोषण के मामले में मुकदमा दर्ज करने का बड़ा आदेश दिया है। पॉक्सो (POCSO) स्पेशल कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी पुलिस को इस मामले में एफआईआर दर्ज कर गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह कानूनी कार्रवाई शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दाखिल की गई अर्जी पर आधारित है। ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया था कि माघ मेले के दौरान उनके पास कुछ पीड़ित बच्चे आए थे, जिन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर कुकर्म के गंभीर आरोप लगाए।

मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

नाबालिगों का शोषण: आश्रम की सेवा में लगे लगभग 20 नाबालिग बच्चों के साथ कथित तौर पर यौन शोषण किया गया।

आशीर्वाद के नाम पर दबाव: आरोप है कि शिष्य बच्चों पर यह कहकर संबंध बनाने का दबाव डालते थे कि इससे उन्हें 'गुरु का आशीर्वाद' मिलेगा।

साक्ष्य: शिकायतकर्ता का दावा है कि उनके पास इस कृत्य से जुड़ी सीडी और अन्य ठोस साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें अदालत को सौंप दिया गया है।

अदालत की कार्यवाही और फैसला

13 फरवरी को कोर्ट में दो नाबालिगों के बयान वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए गए थे। पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट और पीड़ितों के बयानों का संज्ञान लेने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को तत्काल केस दर्ज करने का आदेश दिया।

"हमें अदालत से न्याय मिला है। अब मैं प्रयागराज से विद्या मठ वाराणसी तक 'पैदल सनातन यात्रा' निकालकर लोगों के सामने इस कड़वी सच्चाई को उजागर करूँगा।"

आशुतोष ब्रह्मचारी (शिकायतकर्ता)

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष: 'साजिश का शिकार'

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इन्हें पूरी तरह निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताया है।

गौ-सेवा अभियान: उनका तर्क है कि वे 'गाय को राष्ट्रमाता' घोषित करने और गौ-हत्या रोकने का अभियान चला रहे हैं, जिसके कारण उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है।

प्रति-आरोप: उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी ने कोर्ट में 104 पन्नों का हलफनामा दाखिल कर शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के पुराने आपराधिक इतिहास (27 मुकदमे) का हवाला दिया है और इसे छवि धूमिल करने की कोशिश करार दिया है।

आगे क्या?

कोर्ट के इस आदेश के बाद अब झूंसी थाना पुलिस आधिकारिक रूप से मुकदमा दर्ज करेगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि चूंकि मामला पॉक्सो एक्ट से जुड़ा है, इसलिए पुलिस को साक्ष्यों और बयानों के आधार पर त्वरित कार्रवाई करनी होगी। इस मामले ने धार्मिक और सामाजिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

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