बिहार में राज्यसभा चुनाव की सुगबुगाहट: उपेंद्र कुशवाहा की सीट पर RLM ने ठोका दावा, बीजेपी को याद दिलाई 'पुरानी डील'
बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की प्रचंड जीत के बाद अब एनडीए (NDA) के भीतर राज्यसभा सीटों को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। आगामी 9 अप्रैल को बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की सीट भी शामिल है। शनिवार को RLM ने साफ कर दिया कि वे कुशवाहा के लिए फिर से राज्यसभा की उम्मीदवारी पर कोई समझौता नहीं करेंगे।
21 Feb 2026
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पटना | बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की प्रचंड जीत के बाद अब एनडीए (NDA) के भीतर राज्यसभा सीटों को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। आगामी 9 अप्रैल को बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की सीट भी शामिल है। शनिवार को RLM ने साफ कर दिया कि वे कुशवाहा के लिए फिर से राज्यसभा की उम्मीदवारी पर कोई समझौता नहीं करेंगे।
"202 सीटों की जीत में हमारा भी पसीना"
RLM प्रवक्ता राम पुकार सिंह ने शनिवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि बिहार में एनडीए को मिली 202 सीटों की ऐतिहासिक जीत में उनकी पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने सभी 243 सीटों पर मेहनत की, जिसका फल गठबंधन को मिला है।
बीजेपी के साथ 'सीक्रेट डील' का खुलासा
राम पुकार सिंह ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि विधानसभा चुनाव के समय सीटों के बंटवारे के दौरान ही बीजेपी के साथ एक 'डील' तय हुई थी।
RLM के दावे के मुख्य बिंदु:
चुनावी शर्त: समझौते के तहत RLM को एक राज्यसभा और एक विधान परिषद (MLC) की सीट देने का वादा किया गया था।
हक की बात: प्रवक्ता ने कहा, "हम इसी हक के साथ कह रहे हैं कि उपेंद्र कुशवाहा को दोबारा राज्यसभा भेजा जाना चाहिए। यह शर्त बीजेपी के साथ पहले ही तय हो चुकी थी।"
अन्य सहयोगियों की मांग: जब चिराग पासवान और जीतन राम मांझी की संभावित दावेदारी पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि हर कोई अपने दम पर मांग करता है, लेकिन हमारी बात बीजेपी से पहले ही फाइनल हो चुकी है।
बीजेपी के पाले में गेंद
उपेंद्र कुशवाहा को पिछली बार बीजेपी ने अपने कोटे से राज्यसभा भेजा था। अब सवाल यह है कि क्या नई परिस्थितियों में बीजेपी फिर से अपना कोटा कुशवाहा को देगी?
राज्यसभा का समीकरण:
सीटें खाली हो रही हैं: 5 सीटें (9 अप्रैल को कार्यकाल समाप्त)।
दावेदार: बीजेपी, जेडीयू के अलावा चिराग पासवान (LJP-R) और जीतन राम मांझी (HAM) की नज़रें भी इन सीटों पर टिकी हैं।
RLM का रुख: यदि बीजेपी वादे से मुकरती है, तो RLM ने फिलहाल इसे शीर्ष नेतृत्व का मामला बताकर गेंद एनडीए के घटक दलों की बैठक पर टाल दी है।
भविष्य की राह
बिहार की राजनीति में 'किंगमेकर' की भूमिका निभाने वाले छोटे दल अब अपनी हिस्सेदारी को लेकर मुखर हैं। यदि उपेंद्र कुशवाहा को दोबारा मौका नहीं मिलता है, तो राज्य के राजनीतिक समीकरणों में नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।