MVA में सीटों का 'महा-संग्राम': राज्यसभा और विधान परिषद पर कांग्रेस-शिवसेना (UBT) में रार, क्या किनारे होंगे शरद पवार?

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर 'सीटों के गणित' ने महा विकास आघाडी (MVA) के भीतर दरारें दिखाना शुरू कर दिया है। आगामी राज्यसभा की सात और विधान परिषद की नौ सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले गठबंधन के सहयोगियों में खींचतान चरम पर है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उद्धव ठाकरे अब मध्यस्थों के बजाय सीधे कांग्रेस हाईकमान से बातचीत करने दिल्ली कूच करने की तैयारी में हैं, जिससे शरद पवार गुट की 'अनदेखी' की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

22 Feb 2026  |  18

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर 'सीटों के गणित' ने महा विकास आघाडी (MVA) के भीतर दरारें दिखाना शुरू कर दिया है। आगामी राज्यसभा की सात और विधान परिषद की नौ सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले गठबंधन के सहयोगियों में खींचतान चरम पर है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उद्धव ठाकरे अब मध्यस्थों के बजाय सीधे कांग्रेस हाईकमान से बातचीत करने दिल्ली कूच करने की तैयारी में हैं, जिससे शरद पवार गुट की 'अनदेखी' की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

एक अनार, सौ बीमार: क्या है सीटों का अंकगणित?

आगामी 16 मार्च को राज्यसभा की 7 सीटों के लिए मतदान होना है। वर्तमान विधायी संख्या बल के आधार पर जीत के लिए 36 वोटों का कोटा तय किया गया है।

राज्यसभा की स्थिति: MVA के पास वर्तमान में लगभग 50 विधायक हैं। इस संख्या के साथ गठबंधन आसानी से एक सीट जीत सकता है, लेकिन दावेदार तीन हैं।

विधान परिषद का पेंच: अगले महीने खाली होने वाली 9 सीटों के लिए 29 वोटों की आवश्यकता होगी। यहाँ भी MVA को कम से कम एक सीट जीतने का भरोसा है, लेकिन खींचतान इसी एक सीट पर है।

प्रमुख दावेदारों के बीच फंसा पेंच

गठबंधन के तीनों प्रमुख दल अपनी-अपनी प्राथमिकताएं गिना रहे हैं, जिससे समन्वय बिठाना मुश्किल हो रहा है:

दलवर्तमान स्थिति / मांगमुख्य चुनौती
शिवसेना (UBT)प्रियंका चतुर्वेदी की सीट खाली हो रही है।उद्धव ठाकरे प्रियंका को दोबारा सदन भेजना चाहते हैं।
कांग्रेसदो सीटें खाली हो रही हैं।कांग्रेस कम से कम एक सीट पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं है।
NCP (शरद पवार)एक सीट शरद पवार के पास है।पवार दोबारा जाएंगे या नहीं, इस पर सस्पेंस बरकरार है।

शरद पवार की 'अनदेखी' के मायने?

सूत्रों का दावा है कि शुरुआती दौर की चर्चाओं में शरद पवार गुट को शामिल नहीं किया गया है। उद्धव ठाकरे का सीधे कांग्रेस नेतृत्व (दिल्ली) से संपर्क करना इस बात का संकेत है कि शिवसेना (UBT) अब गठबंधन में 'बड़े भाई' की भूमिका को फिर से परिभाषित करना चाहती है। पवार जैसे कद्दावर नेता की अनुपस्थिति में होने वाली यह चर्चा गठबंधन के भविष्य के स्थायित्व पर सवालिया निशान लगा रही है।

क्या होगा अगला कदम?

16 मार्च की डेडलाइन नजदीक है। यदि उद्धव ठाकरे और कांग्रेस हाईकमान के बीच सहमति नहीं बनती है, तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों के गठबंधन पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें उद्धव ठाकरे के दिल्ली दौरे पर टिकी हैं।

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