लाल गलियारे को बड़ा झटका: 1 करोड़ के इनामी माओवादी कमांडर 'देवजी' का आत्मसमर्पण

प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। संगठन के शीर्ष कमांडर और मुख्य रणनीतिकार थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष हथियार डाल दिए हैं। 62 वर्षीय देवजी न केवल माओवादी खेमे के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक थे, बल्कि उन्हें संगठन के अगले संभावित प्रमुख के रूप में भी देखा जा रहा था।

22 Feb 2026  |  16

हैदराबाद | प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। संगठन के शीर्ष कमांडर और मुख्य रणनीतिकार थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष हथियार डाल दिए हैं। 62 वर्षीय देवजी न केवल माओवादी खेमे के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक थे, बल्कि उन्हें संगठन के अगले संभावित प्रमुख के रूप में भी देखा जा रहा था।

उत्तराधिकारी की दौड़ में थे शामिल

जगतियाल जिले के निवासी देवजी पर सरकार ने 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। मई 2025 में अंबाला केशव राव (बासवराजू) की मृत्यु के बाद, देवजी को माओवादी संगठन का उत्तराधिकारी माना जा रहा था। वे पार्टी की 'सेंट्रल कमेटी' और 'पोलित ब्यूरो' के अत्यंत प्रभावशाली सदस्य रहे हैं।

PLGA के निर्माण में निभाई थी अहम भूमिका

देवजी केवल एक नेता ही नहीं, बल्कि एक कुशल सैन्य रणनीतिकार भी थे। उन्होंने माओवादियों की सैन्य शाखा 'पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी' (PLGA) के गठन और उसे मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके साथ वरिष्ठ नेता मल्ला राजी रेड्डी और कई अन्य कैडरों ने भी आत्मसमर्पण किया है, जिसे माओवादी विचारधारा के पतन के रूप में देखा जा रहा है।

मार्च 2026 की समय सीमा से पहले बड़ी सफलता

केंद्र सरकार ने देश से माओवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए मार्च 2026 की समय सीमा तय की है। इस लक्ष्य से ठीक पहले इतने बड़े स्तर पर हुआ आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों की बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है।

"तेलंगाना पुलिस की 'आत्मसमर्पण और पुनर्वास योजना' का असर दिख रहा है। पिछले दो वर्षों में अब तक 588 माओवादी मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं।"

बी. शिवधर रेड्डी, डीजीपी, तेलंगाना

मुख्यधारा में वापसी का मार्ग

तेलंगाना पुलिस ने एक बार फिर माओवादियों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट आएं। आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को राज्य सरकार की पुनर्वास योजना के तहत आर्थिक और सामाजिक सहायता प्रदान की जाएगी ताकि वे गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।

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