'100 विधायक लाओ, मुख्यमंत्री बन जाओ': अखिलेश यादव का डिप्टी सीएम को खुला ऑफर, भाजपा पर साधा तीखा निशाना
उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर 'ऑफर पॉलिटिक्स' की गूँज सुनाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री (केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक) को एक बार फिर खुला चुनौतीपूर्ण प्रस्ताव दिया है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के भीतर चल रही अंतर्कलह का समाधान यही है कि वे अपने साथ 100 विधायक लेकर आएं और मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालें।
22 Feb 2026
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर 'ऑफर पॉलिटिक्स' की गूँज सुनाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री (केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक) को एक बार फिर खुला चुनौतीपूर्ण प्रस्ताव दिया है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के भीतर चल रही अंतर्कलह का समाधान यही है कि वे अपने साथ 100 विधायक लेकर आएं और मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालें।
'एक हफ्ते के मुख्यमंत्री' वाले बयान से बढ़ी हलचल
गोरखपुर में इलाज के दौरान कथित लापरवाही से 19 लोगों की आंखों की रोशनी जाने की दुखद घटना पर सरकार को घेरते हुए अखिलेश ने पुरानी पेशकश दोहराई। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा:
"हम अपना ऑफर फिर से दोहराते हैं—100 विधायक लाओ और मुख्यमंत्री बन जाओ। जो 100 विधायक साथ लाएगा, वह कम से कम एक हफ्ते के लिए तो मुख्यमंत्री बनेगा ही।"
माना जा रहा है कि अखिलेश ने 'एक हफ्ते' का जिक्र इसलिए किया क्योंकि वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी चार दिनों के लिए जापान के दौरे पर जा रहे हैं। सपा प्रमुख ने इस बहाने भाजपा के भीतर की खींचतान पर गहरा कटाक्ष किया है।
शंकराचार्य के मुद्दे पर सरकार को घेरा
रविवार को सपा कार्यालय में मीडिया से रूबरू होते हुए अखिलेश यादव ने शंकराचार्य के अपमान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने माघ मेले के दौरान शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोके जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।
सपा प्रमुख के संबोधन के मुख्य बिंदु:
सनातनी परंपरा का अपमान: अखिलेश ने कहा कि इतिहास में शायद पहली बार किसी शंकराचार्य को स्नान करने से रोका गया है, वह भी कड़ाके की ठंड के बीच धरने पर बैठने के बावजूद।
पुराने मामलों की राजनीति: शंकराचार्य पर लगे 20 साल पुराने यौन शोषण के आरोपों और एफआईआर के आदेश पर उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें अपमानित करने के लिए पुराने मामले खोदकर ला रही है।
रामभद्राचार्य पर तीखी टिप्पणी: शिकायतकर्ता के तार रामभद्राचार्य से जुड़ने पर अखिलेश ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, "अगर शिकायतकर्ता उनका शिष्य है, तो मुझसे गलती हुई कि मैंने कभी रामभद्राचार्य पर दर्ज मुकदमा वापस लिया था, मुझे उन्हें जेल भेज देना चाहिए था।"
"अब यह सरकार बचने वाली नहीं है"
अखिलेश यादव ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन जिस स्तर पर जाकर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति हो रही है, उसे जनता देख रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संतों का अपमान और प्रशासनिक विफलताएं इस सरकार के पतन का कारण बनेंगी।