आर्कटिक का 'कोल्ड वॉर': -34°C में अमेरिका और नाटो की महायुद्ध की तैयारी, रूस की घेराबंदी तेज
ग्लोबल वार्मिंग के कारण आर्कटिक की पिघलती बर्फ ने दुनिया के नक्शे पर एक नया 'बैटलग्राउंड' तैयार कर दिया है। रूस की बढ़ती सैन्य दादागिरी के बीच, अमेरिका और नाटो (NATO) देशों के सैनिकों ने उत्तरी स्वीडन के बर्फीले जंगलों में तीन हफ्तों की कमरतोड़ स्पेशल ट्रेनिंग पूरी की है। यह अभ्यास इस बात का संकेत है कि भविष्य का संघर्ष अब मरुस्थलों या जंगलों में नहीं, बल्कि शून्य से नीचे के तापमान वाले ध्रुवीय इलाकों में हो सकता है।
23 Feb 2026
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स्टॉकहोम/उत्तरी स्वीडन: ग्लोबल वार्मिंग के कारण आर्कटिक की पिघलती बर्फ ने दुनिया के नक्शे पर एक नया 'बैटलग्राउंड' तैयार कर दिया है। रूस की बढ़ती सैन्य दादागिरी के बीच, अमेरिका और नाटो (NATO) देशों के सैनिकों ने उत्तरी स्वीडन के बर्फीले जंगलों में तीन हफ्तों की कमरतोड़ स्पेशल ट्रेनिंग पूरी की है। यह अभ्यास इस बात का संकेत है कि भविष्य का संघर्ष अब मरुस्थलों या जंगलों में नहीं, बल्कि शून्य से नीचे के तापमान वाले ध्रुवीय इलाकों में हो सकता है।
9/11 के शूरवीर अब बर्फ के मैदान में
इस विशेष कोर्स में करीब 100 नाटो सैनिकों ने हिस्सा लिया, जिसमें अमेरिकी सेना के 12 'ग्रीन बेरेट्स' (Green Berets) शामिल थे। ये वही स्पेशल फोर्स है जिसने 9/11 के बाद आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों में लोहा मनवाया था। हालांकि, अफगानिस्तान की तपती रेत और आर्कटिक की बर्फीली हवाओं के बीच का अंतर जमीन-आसमान का है।
चुनौती: दुश्मन से पहले प्रकृति से जंग
उत्तरी स्वीडन में पारा -34°C तक गिर जाता है, जहाँ दुश्मन की गोली से पहले 'फ्रॉस्टबाइट' और 'हाइपोथर्मिया' जान ले सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान सामने आई कुछ प्रमुख चुनौतियां:
कैलोरी का संकट: बिना किसी कठिन लड़ाई के, एक सैनिक को केवल शरीर गर्म रखने के लिए रोज 3,000 कैलोरी जलानी पड़ती है।
अदृश्य खतरे: बर्फ की मोटी चादर छोटी से छोटी चीज को ढक लेती है, जिससे दिशा भ्रम और सामान खोने का डर बना रहता है।
शारीरिक क्षति: ट्रेनिंग के दौरान एक अमेरिकी सैनिक को भीषण ठंड के कारण हाथ में फोड़ा होने पर घर भेजना पड़ा, वहीं एक यूरोपीय सैनिक गीले मोजे न बदलने के कारण फ्रॉस्टबाइट का शिकार होते-होते बचा।
ट्रेनिंग का मुख्य फोकस: 'सर्वाइवल ही जीत है'
नॉर्डिक देशों के अनुभवी प्रशिक्षकों ने सैनिकों को युद्ध से पहले 'जिंदा रहने की कला' सिखाई:
स्वेट कंट्रोल: पसीने पर नियंत्रण रखना (क्योंकि पसीना जमने पर शरीर का तापमान तेजी से गिरा सकता है)।
संसाधन प्रबंधन: बर्फ पिघलाकर पानी बनाना और भारी स्लेज (Sledges) खींचना।
सही पहनावा: कड़ाके की ठंड में शरीर की गर्मी को लॉक करने की तकनीक।
रणनीतिक महत्व: क्यों अहम है आर्कटिक?
आर्कटिक अब केवल बर्फ का ढेर नहीं, बल्कि व्यापार और सैन्य बढ़त का केंद्र है।
रूस का प्रभुत्व: रूस ने पहले ही इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और बुनियादी ढांचा मजबूत कर लिया है।
नए समुद्री मार्ग: पिघलती बर्फ से नए व्यापारिक रास्ते खुल रहे हैं, जिन पर नियंत्रण भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था की कुंजी है।
विशेषज्ञ की राय: "अमेरिका को अब रेगिस्तान और जंगलों के अनुभव से बाहर निकलकर नॉर्डिक देशों की तरह ठंडे इलाकों में विशेषज्ञता हासिल करनी होगी। आर्कटिक भविष्य में रूस के साथ टकराव का मुख्य केंद्र (Flashpoint) बन सकता है।"