हल्द्वानी बेदखली मामला: मानवीय संवेदना और विकास के बीच सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर बसे हजारों परिवारों के भविष्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और संतुलित रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि विकास और विस्थापन के बीच 'पुनर्वास' ही प्राथमिकता होनी चाहिए। कोर्ट ने उत्तराखंड विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रभावित परिवारों के लिए विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं ताकि वे प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत घर पाने के लिए अपनी पात्रता सिद्ध कर सकें।
24 Feb 2026
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नई दिल्ली/हल्द्वानी हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर बसे हजारों परिवारों के भविष्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और संतुलित रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि विकास और विस्थापन के बीच 'पुनर्वास' ही प्राथमिकता होनी चाहिए। कोर्ट ने उत्तराखंड विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रभावित परिवारों के लिए विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं ताकि वे प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत घर पाने के लिए अपनी पात्रता सिद्ध कर सकें।
रमजान के बाद लगेगा विशेष शिविर
मानवीय पहलुओं और धार्मिक संवेदनाओं का सम्मान करते हुए, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के आग्रह को स्वीकार कर लिया है। अब ये पंजीकरण शिविर 15 मार्च के बाद लगाए जाएंगे, ताकि रमजान के दौरान लोगों को असुविधा न हो। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि:
यह पूरी प्रक्रिया 31 मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरी की जानी चाहिए।
नैनीताल के जिला कलेक्टर प्रत्येक परिवार की पात्रता की जांच करेंगे और अपनी विस्तृत रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपेंगे।
पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए बनभूलपुरा में ही एक पुनर्वास केंद्र बनाया जाएगा, जहाँ परिवार के मुखिया फॉर्म भर सकेंगे।
'अतिक्रमणकारियों को जमीन चुनने का अधिकार नहीं'
सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह भी साफ कर दिया कि अतिक्रमण करने वालों को यह अधिकार नहीं है कि वे रेलवे की जमीन के इस्तेमाल का फैसला करें या उसी स्थान पर रहने की जिद करें। रेलवे ने अपनी दलील में कहा कि ट्रैक विस्तार के लिए यह 30 हेक्टेयर भूमि अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके आगे पहाड़ी क्षेत्र शुरू हो जाता है।
"अदालत का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र व्यक्ति छत विहीन न रहे, लेकिन सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता भी अनिवार्य है।"
सरकार और रेलवे का पक्ष: भत्ते और सहायता का आश्वासन
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि विस्थापित होने वाले पात्र परिवारों को छह महीने तक ₹2,000 प्रति माह का भत्ता दिया जाएगा। इसके अलावा, रेलवे और राज्य सरकार मिलकर प्रभावित परिवारों की पहचान और उनके पुनर्वास के लिए वित्तीय भार साझा करेंगे।
एक नज़र में मुख्य बिंदु:
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| अगली सुनवाई | अप्रैल 2026 |
| कुल प्रभावित परिवार | लगभग 5,000 (50,000 लोग) |
| शिविर की शुरुआत | 19 मार्च से (संभावित) |
| सरकारी सहायता | PMAY आवास और 6 माह का भत्ता |
| सुरक्षा | अप्रैल 2026 तक बेदखली की कार्रवाई पर रोक |
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दशकों से रह रहे लोगों का पक्ष रखते हुए पट्टे वाली जमीन और स्थानीय मैपिंग का हवाला दिया। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल सारा ध्यान पात्र लोगों को PMAY के दायरे में लाने पर केंद्रित किया है।
इस आदेश के बाद अब जिला प्रशासन और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी जरूरतमंद इस योजना से वंचित न रहे।