'यादव जी की लव स्टोरी' पर विवाद: फिल्म की रिलीज रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सिनेमा और सामाजिक संवेदनाओं के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई है। अपकमिंग फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' की देशव्यापी रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म का शीर्षक और इसकी प्रस्तुति न केवल जाति-आधारित रूढ़ियों (Stereotypes) को बढ़ावा देती है, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है।

24 Feb 2026  |  13

नई दिल्ली। सिनेमा और सामाजिक संवेदनाओं के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई है। अपकमिंग फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' की देशव्यापी रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म का शीर्षक और इसकी प्रस्तुति न केवल जाति-आधारित रूढ़ियों (Stereotypes) को बढ़ावा देती है, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है।

"गरिमा का अधिकार मौलिक अधिकार है"

अधिवक्ता मकरध्वज यादव द्वारा दायर इस याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए तर्क दिया गया है कि:

सामूहिक प्रतिष्ठा: फिल्म का शीर्षक एक विशिष्ट समुदाय को सीधे तौर पर कथानक से जोड़ देता है, जिससे समुदाय की छवि धूमिल होने की आशंका है।

कानून-व्यवस्था: देश के विभिन्न हिस्सों में यादव समुदाय द्वारा विरोध प्रदर्शन और जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापनों से स्पष्ट है कि फिल्म की रिलीज से शांति भंग हो सकती है।

अपूरणीय क्षति: याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि फिल्म एक बार रिलीज हो गई, तो उससे होने वाले सामाजिक नुकसान की भरपाई संभव नहीं होगी।

याचिका में कोर्ट से अंतरिम रोक की मांग की गई है ताकि निर्माताओं को आपत्तिजनक अंशों या शीर्षक में संशोधन का अवसर मिल सके। अब सबकी नजरें शीर्ष अदालत के रुख पर टिकी हैं कि वह अभिव्यक्ति की आजादी और सामुदायिक गरिमा के बीच कैसे संतुलन बनाती है।

2. केरल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: 'नवा केरल सर्वेक्षण' पर लगी रोक हटी

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। केरल की पिनाराई विजयन सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी न्यायिक जीत मिली है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को केरल हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी, जिसने राज्य के महत्वाकांक्षी 'नवा केरल सर्वेक्षण' को रोक दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सरकार को सर्वेक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की हरी झंडी मिल गई है।

क्या था विवाद?

पिछले हफ्ते केरल हाईकोर्ट ने केरल छात्र संघ (KSU) की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस सर्वेक्षण को 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' बताया था। हाईकोर्ट ने इसे रद्द करते हुए निम्नलिखित आपत्तियां जताई थीं:

इस अभियान के लिए कोई उचित बजट आवंटन नहीं किया गया था।

इसे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और आगामी चुनावों से पहले डेटा संग्रह का एक राजनीतिक हथियार माना गया था।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दलील दी कि यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के स्थगन आदेश को निष्प्रभावी कर दिया है। मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 13 अप्रैल को तय की गई है। तब तक के लिए सरकार के पास इस सर्वेक्षण को जारी रखने का कानूनी अधिकार वापस आ गया है।

मुख्य बिंदु: एक नजर में

मामलावर्तमान स्थितिअगली कार्यवाही
यादव जी की लव स्टोरीयाचिका दाखिल, रोक की मांगकोर्ट के संज्ञान का इंतजार
नवा केरल सर्वेक्षणरोक हटी, सरकार को मिली राहत13 अप्रैल को सुनवाई

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