ईरान के खिलाफ अमेरिकी 'आर्मडा': USS जेराल्ड आर. फोर्ड की तैनाती ने तोड़े रिकॉर्ड, पर 'टूटी' टॉयलेट ने बढ़ाई सिरदर्दी

मिडिल ईस्ट में दशकों बाद अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य घेराबंदी देखने को मिल रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई चेतावनी के बीच, दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड इस समय इजरायल के पास भूमध्य सागर में तैनात है। लेकिन, 13 अरब डॉलर (करीब ₹1 लाख करोड़) की लागत से बना यह 'तैरता हुआ किला' इन दिनों अपनी मारक क्षमता से ज्यादा अपनी 'खराब टॉयलेट' और 'प्लंबिंग सिस्टम' को लेकर चर्चा में है।

24 Feb 2026  |  12

वाशिंगटन/दुबई | मिडिल ईस्ट में दशकों बाद अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य घेराबंदी देखने को मिल रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई चेतावनी के बीच, दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड इस समय इजरायल के पास भूमध्य सागर में तैनात है। लेकिन, 13 अरब डॉलर (करीब ₹1 लाख करोड़) की लागत से बना यह 'तैरता हुआ किला' इन दिनों अपनी मारक क्षमता से ज्यादा अपनी 'खराब टॉयलेट' और 'प्लंबिंग सिस्टम' को लेकर चर्चा में है।

8 महीने का लंबा मिशन और टूटता धैर्य

USS जेराल्ड आर. फोर्ड पिछले साल जून से ही समुद्र में है। जनवरी 2026 में वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के मिशन में अहम भूमिका निभाने के बाद, इस पोत को वापस अमेरिका लौटना था। हालांकि, ईरान के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इसकी तैनाती दूसरी बार बढ़ा दी है।

ऐतिहासिक तैनाती: सेवानिवृत्त रियर एडमिरल मार्क मोंटगोमरी के अनुसार, शांति काल में एक कैरियर की तैनाती 6 महीने की होती है, लेकिन फोर्ड 8 महीने पूरे कर चुका है और यह 11 महीने तक खिंच सकती है, जो एक नया रिकॉर्ड होगा।

सैनिकों में नाराजगी: 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक, पोत पर तैनात करीब 5,000 नाविक (Sailors) मानसिक तनाव और थकान से जूझ रहे हैं। कई युवा सैनिकों ने तैनाती खत्म होते ही नौसेना छोड़ने की इच्छा जताई है।

$13 बिलियन के पोत में टॉयलेट संकट

NPR और अन्य अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अत्याधुनिक पोत का वैक्यूम प्लंबिंग सिस्टम बुरी तरह लड़खड़ा गया है।

एक टॉयलेट खराब, तो पूरा सेक्शन बंद: चूंकि यह सिस्टम वैक्यूम तकनीक पर आधारित है, इसलिए एक टॉयलेट में समस्या आने पर पूरे हिस्से की सक्शन पावर खत्म हो जाती है।

मरम्मत में जुटे इंजीनियर: नाविकों को 24-24 घंटे लीकेज ठीक करने में बिताने पड़ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि टॉयलेट पाइप्स से टी-शर्ट और 4-फीट तक की रस्सियाँ निकल रही हैं।

महंगा रखरखाव: पाइपों में कैल्शियम जमने के कारण नौसेना को हर बार 'एसिड फ्लश' करना पड़ता है, जिसकी एक बार की लागत $400,000 (लगभग 3.3 करोड़ रुपये) आती है।

खाड़ी में सैन्य शक्ति का प्रदर्शन

भले ही अंदरूनी तौर पर पोत समस्याओं से घिरा हो, लेकिन सामरिक रूप से यह ईरान के लिए बड़ी चुनौती है।

दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप: मिडिल ईस्ट में इस समय USS अब्राहम लिंकन और USS जेराल्ड आर. फोर्ड दोनों मौजूद हैं। यह स्थिति दुर्लभ है क्योंकि दो कैरियर मिलकर 150 से ज्यादा लड़ाकू विमान और हजारों मिसाइलें ले जाने की क्षमता रखते हैं।

कुल सैन्य बल: इस क्षेत्र में अमेरिका के पास अब एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत हैं, जिनमें 9 डिस्ट्रॉयर और 3 लिटोरल कॉम्बैट जहाज शामिल हैं।

मुख्य आंकड़े: एक नजर में

विवरणसांख्यिकी
पोत की लागत$13 बिलियन
कुल नाविकलगभग 5,000
टॉयलेट की संख्यालगभग 650
एसिड फ्लश की लागत$400,000 प्रति बार
मौजूदा लोकेशनइजरायल का तट (हैफा के पास)

विशेषज्ञ की राय: "जब रखरखाव और अपग्रेड को टाला जाता है, तो उपकरण टूटने लगते हैं। फोर्ड की मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि अत्यधिक सैन्य दबाव का असर न केवल तकनीक पर, बल्कि इंसानी मनोबल पर भी पड़ता है।"

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