भारत-पाक युद्ध पर ट्रंप का दावा—"मेरी दखलंदाजी से बची 35 मिलियन जान"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का श्रेय लेते हुए बड़ा दावा किया है। अमेरिकी संसद (Congress) को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि साल 2025 में दोनों परमाणु शक्तियों के बीच तनाव इतना बढ़ गया था कि अगर वे हस्तक्षेप नहीं करते, तो दुनिया एक बड़ी तबाही देख सकती थी।
25 Feb 2026
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वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का श्रेय लेते हुए बड़ा दावा किया है। अमेरिकी संसद (Congress) को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि साल 2025 में दोनों परमाणु शक्तियों के बीच तनाव इतना बढ़ गया था कि अगर वे हस्तक्षेप नहीं करते, तो दुनिया एक बड़ी तबाही देख सकती थी।
शहबाज शरीफ के हवाले से किया दावा
ट्रंप ने अपने संबोधन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का जिक्र करते हुए कहा, "शहबाज शरीफ ने मुझसे खुद कहा कि अगर आपने दखल न दिया होता तो आज 35 मिलियन (3.5 करोड़) लोग मारे गए होते।" राष्ट्रपति ने दावा किया कि उनकी कूटनीतिक पहल ने न केवल युद्ध रोका, बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की जान भी बचाई।
200% टैरिफ की धमकी और सीजफायर
ट्रंप ने युद्ध रुकवाने के पीछे अपनी 'आक्रामक व्यापार नीति' का हवाला दिया। उन्होंने कहा:
आर्थिक दबाव: ट्रंप के अनुसार, उन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों को युद्ध न रोकने की स्थिति में 200% आयात शुल्क (Tariff) लगाने की सीधी धमकी दी थी।
बातचीत का असर: उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ से फोन पर बात करने के बाद ही दोनों देश सीजफायर के लिए तैयार हुए।
'ऑपरेशन सिंदूर' और पाकिस्तान की घबराहट
भाषण के दौरान ट्रंप ने पहली बार यह स्वीकार किया कि भारत की सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान बुरी तरह डर गया था।
भारतीय प्रहार: 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कराची सहित कई सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए थे।
अमेरिका से मदद: ट्रंप का दावा है कि भारत की इस कार्रवाई से घबराकर पाकिस्तान अमेरिका के आगे "गिड़गिड़ाया" था और मदद की गुहार लगाई थी।
भारत ने दावों को किया खारिज
हालाँकि ट्रंप अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन भारत सरकार ने उनके इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
स्वतंत्र निर्णय: भारत ने साफ किया है कि सीजफायर का फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया था, न कि किसी अमेरिकी दबाव या टैरिफ की धमकी के कारण।
पुरानी आदत: राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अक्सर वैश्विक घटनाओं का श्रेय लेने के लिए अतिशयोक्तिपूर्ण (exaggerated) बयानबाजी करते हैं।
निष्कर्ष
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वह दुनिया भर में जारी संघर्षों को खत्म करने वाले 'शांतिदूत' के रूप में अपनी छवि पेश कर रहे हैं। हालांकि, भारत के सख्त रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नई दिल्ली अपनी क्षेत्रीय अखंडता के मामलों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करती।