NCERT का बड़ा कदम: अब 8वीं के छात्र पढ़ेंगे न्यायपालिका में 'भ्रष्टाचार' और 'लंबित मुकदमों' का पाठ
नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 8 की सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक को अपडेट करते हुए इसमें भारतीय न्यायपालिका से जुड़े कुछ कड़वे सच और चुनौतियों को शामिल किया है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCFSE) 2023 के अनुरूप तैयार इस किताब में पहली बार ज्यूडिशियरी में व्याप्त भ्रष्टाचार और पेंडिंग केसों के भारी बोझ पर एक विशेष खंड जोड़ा गया है।
25 Feb 2026
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नई दिल्ली: नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 8 की सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक को अपडेट करते हुए इसमें भारतीय न्यायपालिका से जुड़े कुछ कड़वे सच और चुनौतियों को शामिल किया है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCFSE) 2023 के अनुरूप तैयार इस किताब में पहली बार ज्यूडिशियरी में व्याप्त भ्रष्टाचार और पेंडिंग केसों के भारी बोझ पर एक विशेष खंड जोड़ा गया है।
न्यायपालिका की भूमिका: पुरानी बनाम नई किताब
जहाँ पिछले संस्करणों में केवल अदालतों की कार्यप्रणाली और उनके ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया गया था, वहीं नया अध्याय "हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका" सिस्टम की कमियों को उजागर करता है।
| विशेषता | पुराना संस्करण | अपडेटेड संस्करण (2026) |
|---|---|---|
| मुख्य फोकस | कोर्ट का ढांचा और उनकी स्वतंत्रता। | सिस्टम की कमजोरियां और लंबित मामले। |
| भ्रष्टाचार का जिक्र | कोई उल्लेख नहीं था। | अनुभव किए जाने वाले भ्रष्टाचार पर विस्तृत चर्चा। |
| मामलों का आंकड़ा | सामान्य जानकारी। | 5.3 करोड़ से अधिक पेंडिंग केसों का सटीक डेटा। |
पेंडिंग केसों का पहाड़: चौंकाने वाले आंकड़े
किताब में न्याय मिलने में होने वाली देरी को आंकड़ों के जरिए समझाया गया है। वर्तमान में देश की विभिन्न अदालतों में लगभग 5,33,21,000 मामले लंबित हैं:
सुप्रीम कोर्ट: 81,000 केस।
हाई कोर्ट: 62.4 लाख केस।
जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय: लगभग 4.7 करोड़ केस।
भ्रष्टाचार और जवाबदेही पर क्या लिखा है?
पाठ्यपुस्तक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आम लोग न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार का अनुभव करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की गई है:
शिकायत प्रणाली: छात्र अब CPGRAMS (सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम) के बारे में पढ़ेंगे, जिसके जरिए 2017-21 के बीच जजों के खिलाफ 1,600 से ज्यादा शिकायतें मिलीं।
महाभियोग (Impeachment): गंभीर आरोपों की स्थिति में संसद द्वारा जज को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया को भी समझाया गया है।
जजों का आचरण: किताब बताती है कि जज 'कोड ऑफ कंडक्ट' से बंधे होते हैं जो उनके सार्वजनिक और निजी व्यवहार को नियंत्रित करता है।
भरोसा बहाली और पारदर्शिता
किताब में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई के विचारों को भी शामिल किया गया है। उनके अनुसार, भ्रष्टाचार लोगों के भरोसे को तोड़ता है। इसका समाधान तेज, निर्णायक और पारदर्शी कार्रवाई में निहित है। साथ ही, सरकार द्वारा पारदर्शिता बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल का भी जिक्र किया गया है।
निष्कर्ष: बदलाव की जरूरत
पुरानी किताब में अक्सर "जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड" (न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर है) कहावत का जिक्र होता था, लेकिन नई किताब उस देरी के कारणों और सिस्टम के भीतर की बाधाओं को ईमानदारी से छात्रों के सामने रखती है।