मिशन 2027: यूपी में मायावती ने फिर चला 'सोशल इंजीनियरिंग' का दांव, ब्राह्मण कार्ड के साथ चुनाव मैदान में उतरीं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपनी चुनावी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। लंबे समय से सत्ता से दूर रहने के बाद, इस बार बीएसपी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए '2007 वाले विजयी फॉर्मूले' को पुनर्जीवित करने का संकेत दिया है। इसकी पहली झलक जालौन की माधौगढ़ सीट से पार्टी के पहले प्रत्याशी की घोषणा के साथ मिली है।

25 Feb 2026  |  6

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपनी चुनावी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। लंबे समय से सत्ता से दूर रहने के बाद, इस बार बीएसपी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए '2007 वाले विजयी फॉर्मूले' को पुनर्जीवित करने का संकेत दिया है। इसकी पहली झलक जालौन की माधौगढ़ सीट से पार्टी के पहले प्रत्याशी की घोषणा के साथ मिली है।

पहला टिकट, बड़ा संदेश: माधौगढ़ से आशीष पांडेय मैदान में

बीएसपी ने जालौन जिले की माधौगढ़ सीट से आशिष पांडेय को अपना उम्मीदवार बनाया है। गौर करने वाली बात यह है कि मायावती ने चुनाव के लिए अपना पहला टिकट एक ब्राह्मण चेहरे को थमाया है।

रणनीतिक महत्व: माधौगढ़ को बीएसपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। 2017 में पार्टी यहाँ दूसरे स्थान पर रही थी।

आगामी घोषणाएं: सूत्रों के अनुसार, होली के तुरंत बाद कानपुर मंडल की 5 अन्य सीटों पर भी प्रभारियों (प्रत्याशियों) के नामों का ऐलान हो सकता है।

ब्राह्मणों की 'उपेक्षा' को बनाया ढाल

मायावती पिछले कई महीनों से लगातार ब्राह्मण समाज के हितों की बात कर रही हैं। उनके बयानों में भाजपा सरकार के प्रति ब्राह्मणों के कथित असंतोष को भुनाने की स्पष्ट झलक दिखती है:

सरकार पर निशाना: मायावती का कहना है कि वर्तमान सरकार में ब्राह्मण समाज सबसे अधिक 'उपेक्षित और असम्मानित' महसूस कर रहा है।

बीएसपी शासन की याद: अपने 70वें जन्मदिन पर उन्होंने याद दिलाया कि बीएसपी के शासनकाल में ब्राह्मणों को पद, सुरक्षा और सम्मान दिया गया था।

'घूसखोर पंडत' विवाद: हाल ही में एक फिल्म के नाम को लेकर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे पूरे ब्राह्मण समाज का अपमान बताते हुए केंद्र सरकार से बैन लगाने की मांग की।

2007 का वह दौर: "हाथी नहीं गणेश है..."

साल 2007 में मायावती ने उत्तर प्रदेश में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। उस जीत के पीछे "दलित-ब्राह्मण भाईचारा" मुख्य कारण था। उस समय "हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा-विष्णु-महेश है" जैसे नारों ने समूचे उत्तर प्रदेश की राजनीति को हिला दिया था। अब 2027 के महाकुंभ के लिए मायावती फिर से इसी सोशल इंजीनियरिंग को धार दे रही हैं।

अकेले लड़ने का संकल्प

मायावती ने पहले ही साफ कर दिया है कि बीएसपी किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और यूपी की सभी सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। यह कदम विपक्षी दलों के लिए चुनौती बन सकता है, क्योंकि ब्राह्मण और दलित वोट बैंक का एक साथ आना वोटों के ध्रुवीकरण को पूरी तरह बदल सकता है।

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