सियासी भूचाल: क्या कांग्रेस में होगा 'जन सुराज' का विलय? प्रियंका गांधी से मुलाकात पर प्रशांत किशोर ने तोड़ी चुप्पी

बिहार की राजनीति में 'तीसरा विकल्प' बनकर उभरे प्रशांत किशोर (PK) और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की मुलाकात ने देश के राजनीतिक पंडितों को फिर से चर्चा के मेज पर ला खड़ा किया है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने पहली बार इस मुलाकात को स्वीकार करते हुए उन अटकलों पर जवाब दिया है, जो 'जन सुराज' के भविष्य को लेकर लगाई जा रही थीं।

25 Feb 2026  |  9

पटना/नई दिल्ली | बिहार की राजनीति में 'तीसरा विकल्प' बनकर उभरे प्रशांत किशोर (PK) और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की मुलाकात ने देश के राजनीतिक पंडितों को फिर से चर्चा के मेज पर ला खड़ा किया है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने पहली बार इस मुलाकात को स्वीकार करते हुए उन अटकलों पर जवाब दिया है, जो 'जन सुराज' के भविष्य को लेकर लगाई जा रही थीं।

क्या था मुलाकात का एजेंडा?

काफी समय से गुप्त रखी गई इस मुलाकात पर अब खुद प्रशांत किशोर ने मीडिया के सामने आकर चुप्पी तोड़ी है। पीके ने स्वीकार किया कि उनकी मुलाकात प्रियंका गांधी से हुई थी। हालांकि, उन्होंने इस बातचीत के विस्तृत विवरण को साझा नहीं किया, लेकिन इस स्वीकारोक्ति ने ही कई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं:

विलय (Merger): क्या जन सुराज अपना अस्तित्व खत्म कर कांग्रेस का हिस्सा बनेगी?

गठबंधन (Alliance): क्या आगामी चुनावों में कांग्रेस और जन सुराज एक साझा मोर्चे के तहत बिहार में उतरेंगे?

रणनीतिक सलाह: क्या पीके एक बार फिर कांग्रेस के लिए रणनीतिकार की भूमिका में लौट रहे हैं?

पीके का 'बड़ा बयान' और अटकलों का बाजार

प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया है कि राजनीति में संवाद के रास्ते कभी बंद नहीं होते। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने विलय की खबरों को न तो पूरी तरह नकारा और न ही स्पष्ट पुष्टि की, जिससे रहस्य और गहरा गया है।

"मुलाकात हुई है, यह सच है। लेकिन राजनीति में हर मुलाकात का मतलब केवल विलय नहीं होता, बल्कि बड़े उद्देश्यों के लिए विमर्श भी होता है।" — प्रशांत किशोर

क्यों अहम है यह मुलाकात?

बिहार में जन सुराज लगातार अपनी जड़ें जमा रहा है, वहीं कांग्रेस राज्य में अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही है। ऐसे में यह गठबंधन या विलय दोनों दलों के लिए 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है:

कांग्रेस के लिए: पीके का साथ मिलने से कांग्रेस को बिहार में एक नया और ऊर्जावान सांगठनिक ढांचा मिल सकता है।

जन सुराज के लिए: एक राष्ट्रीय पार्टी का साथ मिलने से प्रशांत किशोर की मुहिम को बिहार के बाहर भी पहचान और संसाधन मिल सकते हैं।

अगला कदम क्या होगा?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशांत किशोर फिलहाल अपनी 'पदयात्रा' और जमीनी पकड़ को प्राथमिकता दे रहे हैं, लेकिन प्रियंका गांधी के साथ उनकी बढ़ती नजदीकियां संकेत दे रही हैं कि 2026 और उसके बाद के चुनावों के लिए पर्दे के पीछे एक 'महा-प्लान' तैयार किया जा रहा है।

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