एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका पर विवादित टिप्पणी: परिषद ने मांगी माफी, वितरण पर लगाई रोक

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' के संदर्भों को शामिल करने पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए बिना शर्त माफी मांगी है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस विषय पर कड़ा संज्ञान लेने के बाद, परिषद ने तत्काल प्रभाव से पुस्तक के वितरण पर 'सख्त रोक' लगा दी है।

26 Feb 2026  |  4

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' के संदर्भों को शामिल करने पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए बिना शर्त माफी मांगी है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस विषय पर कड़ा संज्ञान लेने के बाद, परिषद ने तत्काल प्रभाव से पुस्तक के वितरण पर 'सख्त रोक' लगा दी है।

'निर्णय की चूक' और अनजानी गलती

बुधवार देर शाम जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में एनसीईआरटी ने स्वीकार किया कि कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, खंड II' के अध्याय 4 में कुछ अनुचित सामग्री शामिल हो गई थी। परिषद ने इसे 'निर्णय की त्रुटि' (Error of Judgment) बताते हुए कहा कि 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका' शीर्षक वाले अध्याय में ये विसंगतियां अनजाने में हुई थीं।

संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान का संकल्प

परिषद ने अपने स्पष्टीकरण में न्यायपालिका के प्रति अटूट सम्मान प्रकट करते हुए कहा:

"एनसीईआरटी न्यायपालिका को भारतीय संविधान के रक्षक और मौलिक अधिकारों के प्रहरी के रूप में देखती है। हमारा इरादा किसी भी संवैधानिक संस्था के अधिकार को कम करना या उस पर सवाल उठाना कभी नहीं रहा। हम इस सामग्री के शामिल होने पर खेद व्यक्त करते हैं।"

एनसीईआरटी ने दोहराया कि नई पाठ्यपुस्तकों का मूल उद्देश्य छात्रों के भीतर संवैधानिक साक्षरता, संस्थागत सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ को विकसित करना है।

क्या था विवाद का मुख्य कारण?

विवाद तब गहराया जब यह पाया गया कि नई रिलीज़ हुई पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार और मुकदमों के लंबित होने (केस बैकलॉग) जैसे संवेदनशील विषयों पर टिप्पणी की गई थी। कक्षा 8 के स्तर पर इस तरह की चर्चा पहली बार शामिल की गई थी, जबकि पिछले संस्करणों में मुख्य रूप से न्यायालयों की संरचना, उनकी भूमिका और न्याय तक पहुंच पर ध्यान केंद्रित किया जाता था।

आगामी सत्र में मिलेगा संशोधित संस्करण

परिषद ने आश्वस्त किया है कि संबंधित अध्याय को अब विशेषज्ञों और उचित अधिकारियों के परामर्श के बाद पूरी तरह से संशोधित किया जाएगा। पुस्तक का नया और परिष्कृत संस्करण आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत में छात्रों को उपलब्ध कराया जाएगा। परिषद ने संस्था की पवित्रता बनाए रखने के अपने संकल्प को दोहराते हुए इस पूरी घटना पर पुनः खेद जताया है।

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