'द केरल स्टोरी 2' की राह में कानूनी रोड़ा: केरल हाई कोर्ट ने रिलीज पर लगाई अंतरिम रोक

अपनी घोषणा के बाद से ही चर्चा के केंद्र में रही फिल्म 'द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' एक बार फिर कानूनी विवादों के भंवर में फंस गई है। केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक कड़ा रुख अपनाते हुए फिल्म की रिलीज पर 15 दिनों की अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की पीठ ने यह आदेश फिल्म को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया।

26 Feb 2026  |  106

कोच्चि: अपनी घोषणा के बाद से ही चर्चा के केंद्र में रही फिल्म 'द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' एक बार फिर कानूनी विवादों के भंवर में फंस गई है। केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक कड़ा रुख अपनाते हुए फिल्म की रिलीज पर 15 दिनों की अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की पीठ ने यह आदेश फिल्म को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया।

सेंसर बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल

अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म को सर्टिफिकेट देते समय पर्याप्त गंभीरता और सूझबूझ का परिचय नहीं दिया।

अदालत के अनुसार:

गाइडलाइंस की अनदेखी: फिल्म से सामाजिक सौहार्द न बिगड़े, इसके लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

कानून-व्यवस्था का संकट: याचिकाओं में दावा किया गया है कि फिल्म में केरल राज्य का चित्रण भ्रामक है, जिससे प्रदेश की शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

ट्रेलर के बाद बढ़ा था आक्रोश

विपुल अमृतलाल शाह के बैनर तले बनी इस फिल्म का विरोध इसके ट्रेलर रिलीज के साथ ही शुरू हो गया था। सोशल मीडिया पर एक विशेष दृश्य को लेकर भारी जनाक्रोश देखा गया, जिसमें कथित तौर पर एक महिला को जबरदस्ती प्रतिबंधित मांस खिलाते हुए दिखाया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ऐसे दृश्य न केवल उत्तेजक हैं बल्कि एक विशेष समुदाय की छवि को भी धूमिल करते हैं।

क्या है वर्तमान स्थिति?

फिल्म पहले 27 फरवरी को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली थी, लेकिन अब कोर्ट के स्थगन आदेश के बाद मेकर्स को अपनी रणनीति बदलनी होगी।

मुख्य बिंदुविवरण
प्रतिबंध की अवधि15 दिन (अंतरिम रोक)
रिलीज की मूल तारीख27 फरवरी
अदालत का रुखफिल्म देखने की इच्छा व्यक्त की
प्रमुख आपत्तिसामाजिक सौहार्द और गलत चित्रण

अदालत ने अब इस मामले में फिल्म को स्वयं देखने की इच्छा जताई है ताकि विषयवस्तु की गहराई से जांच की जा सके। फिल्म के निर्माताओं ने तर्क दिया कि उनके पास CBFC की वैध स्वीकृति है, लेकिन कोर्ट फिलहाल इस दलील से संतुष्ट नजर नहीं आया।

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