नई दिल्ली/पटना। बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस बीच, भोजपुरी सिनेमा के दिग्गज और भाजपा नेता पवन सिंह की सक्रियता ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। गुरुवार, 26 फरवरी को दिल्ली में पवन सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की, जिसके बाद उनके राज्यसभा जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
1. "जो मालिक चाहेंगे, वही होगा": पवन सिंह
नितिन नवीन से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए पवन सिंह ने इसे एक 'शिष्टाचार भेंट' करार दिया। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ आशीर्वाद लेने आए थे। हालांकि, जब उनसे राज्यसभा उम्मीदवारी को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही सधे हुए अंदाज में जवाब दिया:
"मैं भाई हूँ, जो मालिक चाहेंगे वही न होगा।"
2. क्या है 'पावर स्टार' के साथ भाजपा की डील?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान पवन सिंह ने एनडीए के पक्ष में सघन प्रचार किया था।
चुनावी योगदान: पवन सिंह ने रैलियों में भारी भीड़ जुटाई और उनके गीतों ने एनडीए के पक्ष में माहौल बनाया।
पुराना वादा: कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के समय पार्टी ने उनसे वादा किया था कि उन्हें राज्यसभा के जरिए उच्च सदन भेजा जाएगा। 2024 के लोकसभा चुनाव में काराकाट से निर्दलीय लड़ने और हारने के बाद, यह पवन सिंह के लिए एक 'सम्मानजनक' राजनीतिक वापसी हो सकती है।
3. बिहार राज्यसभा चुनाव: अंकगणित और महत्वपूर्ण तारीखें
बिहार की 5 सीटों पर होने वाले इस चुनाव का पूरा शेड्यूल इस प्रकार है:
नामांकन की आखिरी तारीख: 5 मार्च 2026
चुनाव की तारीख: 16 मार्च 2026
खाली हो रही सीटें: * JDU: हरिवंश नारायण सिंह (उपसभापति) और रामनाथ ठाकुर।
RJD: प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह।
RLM: उपेंद्र कुशवाहा।
खास बात: जिन 5 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उनमें से फिलहाल भाजपा के पास एक भी सीट नहीं है। लेकिन विधानसभा चुनाव में एनडीए की 202 सीटों की प्रचंड जीत के बाद, अब भाजपा और जेडीयू का इन सभी सीटों पर कब्जा करना लगभग तय माना जा रहा है।
4. उपेंद्र कुशवाहा और दीपक प्रकाश का समीकरण
राज्यसभा की एक सीट उपेंद्र कुशवाहा की भी खाली हो रही है। इस बीच, उनके बेटे दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन वे किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। मंत्री पद पर बने रहने के लिए उनका विधान परिषद (MLC) या राज्यसभा का सदस्य बनना अनिवार्य है। माना जा रहा है कि उन्हें MLC बनाया जा सकता है, जिससे भाजपा के लिए पवन सिंह जैसे चेहरों को राज्यसभा भेजने की गुंजाइश बढ़ गई है।
निष्कर्ष: कूटनीतिक 'शतरंज' या सिर्फ शिष्टाचार?
पवन सिंह की यह मुलाकात महज 'आशीर्वाद' तक सीमित है या इसके पीछे दिल्ली में कोई बड़ी स्क्रिप्ट लिखी जा रही है, इसका खुलासा 5 मार्च तक हो जाएगा। यदि पवन सिंह राज्यसभा जाते हैं, तो यह भाजपा का बिहार के युवा और युवा-सांस्कृतिक मतदाताओं को साधने का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक होगा।