"जवाबदेही मांगना देशद्रोह नहीं": अभिषेक मनु सिंघवी ने पेपर लीक और NCERT विवाद पर सरकार को घेरा

वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर चिंता जताई है। गुरुवार को एक एआई समिट के दौरान सिंघवी ने यूथ कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई, पेपर लीक और एनसीईआरटी (NCERT) किताबों में बदलाव जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार की कार्यप्रणाली को 'चिंताजनक' करार दिया।

26 Feb 2026  |  56

नई दिल्ली: वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर चिंता जताई है। गुरुवार को एक एआई समिट के दौरान सिंघवी ने यूथ कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई, पेपर लीक और एनसीईआरटी (NCERT) किताबों में बदलाव जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार की कार्यप्रणाली को 'चिंताजनक' करार दिया।

भारत मंडपम किसी की निजी संपत्ति नहीं: सिंघवी

यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर हुई कार्रवाई का जिक्र करते हुए सिंघवी ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाना लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया:

सार्वजनिक संपत्ति: "भारत मंडपम कोई निजी संपत्ति नहीं बल्कि सार्वजनिक संपत्ति (Public Property) है। वहां प्रदर्शन करना और जवाबदेही मांगना देशद्रोह की श्रेणी में नहीं आता।"

पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल: सिंघवी ने पुलिस द्वारा लगाई गई गंभीर धाराओं (आतंकवाद और देशद्रोह) पर हैरानी जताते हुए कहा कि मासूम बच्चों का पुलिस पर हमला करने का कोई इरादा नहीं था।

NCERT विवाद: "बच्चों को क्या सिखाना चाहती है सरकार?"

एनसीईआरटी की किताबों में न्यायपालिका से जुड़े विवादित अध्यायों पर सिंघवी ने कोर्ट में अपनी दलीलों को दोहराया। उन्होंने कहा:

"हमारा विरोध इस बात पर है कि आप ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक दलों की खामियों पर चुप रहते हैं, लेकिन न्यायपालिका को लेकर आठवीं कक्षा के बच्चों को गलत पाठ पढ़ाना चाहते हैं। अदालत ने भी इस मामले में 'बड़ी साजिश' की आशंका जताई है।"

पेपर लीक और युवा आक्रोश

देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े पेपर लीक मामले पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सिंघवी ने कहा कि जब त्रस्त युवाओं ने अपनी आवाज उठाई, तो उन्हें न्याय के बदले लाठियां मिलीं। उन्होंने राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि आज सत्ता के खिलाफ बोलने को 'देश के खिलाफ बोलना' करार दिया जा रहा है।

लोकतंत्र की दिशा पर उठाए गंभीर सवाल

सिंघवी ने हाल के वर्षों में हुए कई आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि असहमति को साजिश बताया जा रहा है:

महिला पहलवानों का मुद्दा: बीजेपी नेता के खिलाफ जांच की मांग करने वाली पहलवानों के आंदोलन को कुचला गया।

रेप पीड़िता को न्याय: इंडिया गेट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन को 'असुविधा' मानकर जबरन हटा दिया गया।

लोकतंत्र का भविष्य: सिंघवी के अनुसार, "दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को ऐसी दिशा में धकेला जा रहा है जहां सवाल पूछने पर लाठी, मुकदमा और जेल लगभग तय है।"

मुख्य आकर्षण: सिंघवी के बड़े बोल

मुद्दासिंघवी का पक्ष
यूथ कांग्रेस प्रदर्शनशांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है।
NCERT विवादबच्चों के पाठ्यक्रम के जरिए न्यायपालिका की छवि बिगाड़ने की कोशिश।
पेपर लीकयुवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ और उन पर पुलिसिया दमन।
अधिकारजवाबदेही मांगना नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

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