संयुक्त किसान मोर्चा ने छेड़ा राष्ट्रव्यापी अभियान, केंद्र और व्यापार नीतियों के खिलाफ खोला मोर्चा

पनी मांगों को लेकर मुखर रहने वाले संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। गुरुवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए एसकेएम ने दो प्रमुख राष्ट्रव्यापी अभियानों का खाका पेश किया। इस बार किसानों का निशाना न केवल व्यापार नीतियां हैं, बल्कि वे राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और केंद्रीय मंत्रियों की जवाबदेही को लेकर भी आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।

27 Feb 2026  |  112

नई दिल्ली: अपनी मांगों को लेकर मुखर रहने वाले संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। गुरुवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए एसकेएम ने दो प्रमुख राष्ट्रव्यापी अभियानों का खाका पेश किया। इस बार किसानों का निशाना न केवल व्यापार नीतियां हैं, बल्कि वे राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और केंद्रीय मंत्रियों की जवाबदेही को लेकर भी आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।

प्रमुख मांगें और अभियान का केंद्र

किसान संगठन ने इस बार सीधे तौर पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बर्खास्त करने की मांग उठाई है। मोर्चा का मानना है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

इस आंदोलन के केंद्र में तीन मुख्य मुद्दे हैं:

व्यापार समझौते का विरोध: भारत और अमेरिका के बीच होने वाले कृषि व्यापार समझौते पर तत्काल रोक।

मंत्रिमंडल से निष्कासन: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग।

वित्तीय स्वायत्तता और GST: राज्यों के वित्तीय अधिकारों को बहाल करने के लिए जीएसटी (GST) कानून में संशोधन की मांग।

विधानसभाओं में गूंजेगी किसानों की आवाज

एसकेएम ने अपनी रणनीति को जमीनी स्तर पर ले जाने के लिए एक ठोस योजना बनाई है। इसके तहत राज्य और राष्ट्रीय समितियों के सदस्यों वाला एक विशेष प्रतिनिधिमंडल देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से मुलाकात करेगा।

"हम चाहते हैं कि राज्य सरकारें किसानों के हितों की रक्षा के लिए आगे आएं। हमारी मांग है कि राज्य सरकारें इन गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने और केंद्र के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं।" — संयुक्त किसान मोर्चा

आगे की रणनीति

मोर्चा का कहना है कि यह अभियान केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जन-आंदोलन बनाने के लिए गांव-गांव तक संदेश पहुंचाया जाएगा। जीएसटी के कारण राज्यों की घटती आर्थिक शक्ति को भी किसानों ने अपना मुद्दा बनाया है, ताकि संघीय ढांचे की रक्षा की जा सके।

अब देखना यह होगा कि विभिन्न राज्यों की सरकारें किसानों की इस मांग पर क्या रुख अपनाती हैं और क्या केंद्र सरकार इस बढ़ते दबाव के बीच अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करेगी।

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