कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता की चौथी पारी के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मार्च में चुनाव की संभावित घोषणा से पहले, राज्य की राजनीति दो ध्रुवों में बंट गई है। जहाँ भाजपा 'हिंदुत्व' और 'घुसपैठ' के मुद्दों पर ममता को घेर रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपनी दो प्रमुख वेलफेयर योजनाओं—लक्ष्मी भंडार और युवा साथी—को अपनी जीत का मुख्य आधार बनाया है।
1. ममता का 'मास्टर स्ट्रोक': युवा और महिलाएं
ममता बनर्जी की रणनीति इस बार दो बड़े वोट बैंक (महिला और युवा) पर केंद्रित है:
युवा साथी योजना: 21-40 आयु वर्ग के बेरोजगार युवाओं के लिए शुरू की गई इस योजना ने मात्र 9 दिनों में 78 लाख आवेदन के साथ रिकॉर्ड बनाया है। 10वीं पास युवाओं को 1,500 रुपये प्रति माह की सहायता देकर ममता ने भाजपा के हिंदू-मुस्लिम विमर्श के मुकाबले 'आर्थिक सुरक्षा' का कार्ड खेला है।
लक्ष्मी भंडार का विस्तार: 2.42 करोड़ महिलाओं को अब 1,000 के बजाय 1,500 रुपये मासिक मिल रहे हैं। 2021 की जीत में इस योजना की बड़ी भूमिका थी और इस बार इसे और मजबूत किया गया है।
2. भाजपा की रणनीति: SIR और घुसपैठ का मुद्दा
भाजपा इस बार ममता बनर्जी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए 'मतदाता पुनरीक्षण' (SIR) और 'घुसपैठ' पर भरोसा कर रही है।
वोटर लिस्ट से सफाई: भाजपा का मानना है कि SIR के जरिए करीब 1.20 करोड़ अवैध वोटरों (कथित तौर पर घुसपैठिए) के नाम कटेंगे, जो सीधे तौर पर टीएमसी के समर्थकों की संख्या कम करेगा।
ममता का पलटवार: ममता ने इसे भाजपा की 'साजिश' करार देते हुए उन 61 परिवारों के सदस्यों को नौकरी देने का वादा किया है, जिनके परिजनों की SIR के दौरान मृत्यु हुई।
3. चुनावी मैदान में नए समीकरण
इस बार का मुकाबला केवल TMC बनाम भाजपा नहीं है, बल्कि कई छोटे खिलाड़ी खेल बिगाड़ सकते हैं:
नया गठबंधन: हुमायूं कबीर की 'जनता उन्नयन पार्टी' और ओवैसी की AIMIM के साथ आने से मुस्लिम वोटों के बंटवारे का खतरा है।
वाम-कांग्रेस: वामपंथी दल ISF के साथ मिलकर अपनी खोई हुई जमीन तलाश रहे हैं।
| पार्टी | मुख्य चुनावी हथियार / रणनीति |
|---|---|
| TMC | युवा साथी, लक्ष्मी भंडार और क्षेत्रीय अस्मिता। |
| भाजपा | हिंदुत्व, घुसपैठ (CAA/NRC संदर्भ) और भ्रष्टाचार का मुद्दा। |
| हुमायूं कबीर | मुर्शिदाबाद और आसपास के क्षेत्रों में मुस्लिम ध्रुवीकरण। |
निष्कर्ष: वादों बनाम मुद्दों की लड़ाई
बंगाल की जनता के सामने इस बार एक तरफ भाजपा के 'परिवर्तन' और 'घुसपैठ मुक्त बंगाल' का वादा है, तो दूसरी तरफ ममता सरकार की 'नकद लाभ' वाली योजनाएं। हालांकि भाजपा ने घोषणा की है कि वे सरकार बनने पर पुरानी योजनाएं बंद नहीं करेंगे, लेकिन वर्तमान में मिल रहे लाभ के प्रति मतदाताओं का झुकाव टीएमसी के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो रहा है।