चेन्नई/नई दिल्ली। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। AIADMK के निष्कासित कद्दावर नेता और तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) ने शुक्रवार को सत्ताधारी दल DMK की सदस्यता ग्रहण कर ली। चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय 'अन्ना अरिवलयम' में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की उपस्थिति में उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी का पल्ला थामा।
बोदिनायक्कनूर से फिर ठोक सकते हैं ताल
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि DMK पन्नीरसेल्वम को उनकी पारंपरिक सीट बोदिनायक्कनूर से उम्मीदवार बना सकती है। गौरतलब है कि 2021 के चुनाव में उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की थी। पन्नीरसेल्वम के इस कदम को AIADMK के भीतर अपनी खोई हुई पकड़ वापस पाने और प्रतिद्वंद्वी ई.के. पलानीस्वामी (EPS) को कड़ी चुनौती देने के मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है।
समर्थकों का पहले ही हो चुका है मोहभंग
पन्नीरसेल्वम के इस फैसले की नींव हाल की घटनाओं से ही पड़ गई थी:
उनके करीबी सहयोगी आर. वैथिलिंगम और पॉल मनोज पांडियन ने हाल ही में विधायक पद से इस्तीफा देकर DMK का हाथ थाम लिया था।
जयललिता के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले OPS का पलानीस्वामी के साथ लंबे समय तक नेतृत्व को लेकर विवाद चला, जिसके परिणामस्वरुप उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
क्या होगा चुनावी समीकरण पर असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि OPS के इस दल-बदल से तमिलनाडु का वोट बैंक काफी प्रभावित हो सकता है:
थेवर समुदाय का प्रभाव: पन्नीरसेल्वम की पकड़ थेवर समुदाय में बेहद मजबूत मानी जाती है। उनके DMK में आने से दक्षिण तमिलनाडु की कई सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं।
AIADMK को झटका: मुख्य विपक्षी दल AIADMK के लिए अपने पूर्व शीर्ष नेता का विरोधी खेमे में जाना एक बड़ी संगठनात्मक और मनोवैज्ञानिक चुनौती है।
एक नज़र OPS के सफर पर: ओ. पन्नीरसेल्वम तीन बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उन्हें दिवंगत जयललिता का सबसे विश्वासपात्र उत्तराधिकारी माना जाता था। आज का यह घटनाक्रम राज्य की द्रविड़ राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत है।