रांची। चाईबासा में थैलेसीमिया पीड़ित पांच बच्चों के एचआईवी (HIV) संक्रमित होने का हृदय विदारक मामला शुक्रवार को झारखंड विधानसभा के प्रश्नकाल में प्रमुखता से उठा। इस गंभीर लापरवाही को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित रही।
सरकार के जवाब पर विरोधाभास का आरोप
निरसा से भाकपा माले विधायक अरूप चटर्जी ने सरकार को घेरते हुए सवाल किया कि आखिर जांच रिपोर्ट आने में इतनी देरी क्यों हो रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि:
सरकार मामले को दबाने और दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है।
मंत्री के बयान में स्पष्ट विरोधाभास है—एक ओर जांच जारी होने की बात कही जा रही है, तो दूसरी ओर संक्रमण के स्रोत को संदिग्ध बताया जा रहा है।
भाजपा विधायकों ने भी इस मुद्दे पर अरूप चटर्जी का समर्थन किया और सदन में जोरदार नारेबाजी की।
स्वास्थ्य मंत्री का आश्वासन: मुआवजा और इलाज का वादा
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने हंगामे के बीच सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि मामला तकनीकी रूप से जटिल है, इसलिए जांच में समय लग रहा है। उन्होंने सदन को निम्नलिखित जानकारियाँ दीं:
वित्तीय सहायता: पीड़ित परिवारों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है।
इलाज की जिम्मेदारी: संक्रमित बच्चों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
दोषियों पर कार्रवाई: जांच रिपोर्ट आते ही जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
व्यवस्था में सुधार की कवायद
मंत्री ने दावा किया कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से सबक लेते हुए स्वास्थ्य विभाग में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। अब राज्य में ब्लड सेपरेशन यूनिट स्थापित की जा रही हैं ताकि भविष्य में मरीजों को खून चढ़ाए जाने से पहले हर स्तर पर सुरक्षा मानकों की पुष्टि की जा सके।
विपक्ष की मांग: सदन के पटल पर रखी जाए रिपोर्ट
भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने इसे बड़ी आपराधिक लापरवाही करार देते हुए कहा कि पांच मासूमों का जीवन दांव पर लगा है। विपक्ष ने मांग की कि चल रहे सत्र के दौरान ही जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। अंततः विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन सरकार को इस मुद्दे पर कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी।
मामले के मुख्य बिंदु
| मुख्य पक्ष | विवरण |
|---|---|
| घटना स्थल | चाईबासा (थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे) |
| विपक्षी मांग | दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी और जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करना |
| सरकारी पक्ष | 2 लाख का मुआवजा दिया गया; 'ब्लड सेपरेशन यूनिट' पर काम शुरू |
| विवाद का कारण | जांच रिपोर्ट में देरी और मंत्री के बयानों में कथित विसंगति |