टाटा संस में 'चेयरमैन' की कुर्सी पर सस्पेंस: चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर फंसा पेंच, नोएल टाटा की शर्तों ने बढ़ाई हलचल

कॉर्पोरेट जगत के सबसे प्रतिष्ठित 'टाटा समूह' के शीर्ष नेतृत्व को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। टाटा संस के बोर्ड की हालिया बैठक में चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका है। टाटा ट्रस्ट्स की सिफारिशों और बोर्ड के भीतर उभरते 'मतभेदों' ने इस हाई-प्रोफाइल नियुक्ति को दिलचस्प मोड़ पर ला खड़ा किया है।

27 Feb 2026  |  64

मुंबई |  कॉर्पोरेट जगत के सबसे प्रतिष्ठित 'टाटा समूह' के शीर्ष नेतृत्व को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। टाटा संस के बोर्ड की हालिया बैठक में चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका है। टाटा ट्रस्ट्स की सिफारिशों और बोर्ड के भीतर उभरते 'मतभेदों' ने इस हाई-प्रोफाइल नियुक्ति को दिलचस्प मोड़ पर ला खड़ा किया है।

नोएल टाटा की 'शर्तें' बनीं चर्चा का विषय?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर कुछ गंभीर बिंदु उठाए हैं। बोर्ड मीटिंग में जिन प्रमुख चिंताओं पर चर्चा हुई, उनमें शामिल हैं:

भारी निवेश और जोखिम: सेमीकंडक्टर और बैटरी निर्माण जैसे नए क्षेत्रों में हो रहा विशाल निवेश।

घाटे का सौदा: एयर इंडिया जैसी कंपनियों में लगातार हो रहा वित्तीय नुकसान।

लिस्टिंग का मुद्दा: टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट न करने की गारंटी की मांग।

पिछली सिफारिश पर सवाल: पिछले वर्ष ट्रस्टियों द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव की वर्तमान वैधता को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है।

टाटा संस और ट्रस्ट्स का शक्ति संतुलन

टाटा समूह की पूरी बागडोर टाटा ट्रस्ट्स के हाथ में है, जिसकी होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' में लगभग 66% हिस्सेदारी है। इसमें दो प्रमुख ट्रस्टों की भूमिका सबसे अहम है:

ट्रस्ट का नामटाटा संस में हिस्सेदारीहालिया घटनाक्रम
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट~28%नेविल टाटा और भास्कर भट्ट को ट्रस्टी बनाया गया।
सर रतन टाटा ट्रस्ट~23.6%कोरम पूरा न होने से नेविल टाटा की नियुक्ति की बैठक टली।

सरकार की सलाह: "विवाद से बचें, आपसी सहमति बनाएं"

सूत्रों के अनुसार, पिछले एक साल में नेतृत्व के बीच मतभेदों की खबरें गलियारों में तैरती रही हैं। खबर है कि नोएल टाटा और चंद्रशेखरन ने गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात की थी। सरकार की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि इतने बड़े समूह के आंतरिक मुद्दों को 'सार्वजनिक विवाद' से बचाकर आपसी सहमति से सुलझाया जाए।

नियुक्तियों पर भी पड़ रहा है असर

नेतृत्व के इस द्वंद्व का असर ट्रस्ट की अन्य नियुक्तियों पर भी दिख रहा है। जनवरी में सर रतन टाटा ट्रस्ट की बैठक कोरम की कमी के कारण रद्द करनी पड़ी, जिसमें नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा को ट्रस्टी बनाने पर विचार होना था।

निष्कर्ष: एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाना केवल एक व्यक्ति की नियुक्ति नहीं, बल्कि टाटा समूह की भविष्य की व्यावसायिक रणनीति (सेमीकंडक्टर, एविएशन, ईवी) पर मुहर लगाने जैसा होगा। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें टाटा संस के अगले कदम पर टिकी हैं।

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