भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में हल्की गिरावट: ऑल-टाइम हाई से फिसलकर $723.61 अरब पर पहुँचा, फिर भी स्थिति मजबूत

भारतीय अर्थव्यवस्था के 'सुरक्षा कवच' यानी विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में इस सप्ताह मामूली कमी देखी गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 20 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का कुल भंडार 2.11 अरब डॉलर घटकर 723.608 अरब डॉलर रह गया है।

27 Feb 2026  |  69

मुंबई | भारतीय अर्थव्यवस्था के 'सुरक्षा कवच' यानी विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में इस सप्ताह मामूली कमी देखी गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 20 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का कुल भंडार 2.11 अरब डॉलर घटकर 723.608 अरब डॉलर रह गया है।

ऐतिहासिक शिखर के बाद मामूली गिरावट

यह गिरावट एक रिकॉर्ड स्तर को छूने के ठीक बाद आई है। गौर करने वाली बात यह है कि 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 725.727 अरब डॉलर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर (All-Time High) पर पहुंच गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी छलांग के बाद मामूली गिरावट एक सामान्य आर्थिक प्रक्रिया है।

भंडार में कमी के पीछे के प्रमुख कारण

अर्थशास्त्रियों ने इस गिरावट के पीछे निम्नलिखित संभावित कारकों को रेखांकित किया है:

मुद्रा परिसंपत्तियों में बदलाव: विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) के मूल्य में होने वाला उतार-चढ़ाव।

रुपये को सहारा: बाजार में रुपये की विनिमय दर को स्थिर रखने के लिए RBI द्वारा डॉलर की बिक्री।

डॉलर की मजबूती: वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने से अन्य विदेशी मुद्राओं के मूल्य में कमी आना।

क्यों अहम है यह 'आर्थिक ढाल'?

विदेशी मुद्रा भंडार केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि देश की वैश्विक साख का प्रतीक है। इसकी भूमिका को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है:

आयात कवर: कच्चे तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए पर्याप्त पूंजी सुनिश्चित करना।

कर्ज भुगतान: विदेशी ऋणों की अदायगी में निरंतरता बनाए रखना।

निवेशकों का भरोसा: मजबूत भंडार विदेशी निवेशकों (FPI/FDI) को सुरक्षा का एहसास कराता है।

विशेषज्ञों की राय: चिंता की बात नहीं

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का बाहरी सेक्टर अब भी बेहद लचीला और मजबूत है। स्थिर पूंजी प्रवाह और बढ़ते निर्यात के कारण भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दुनिया के सबसे बड़े भंडारों की सूची में अपनी स्थिति मजबूत किए हुए है। वर्तमान स्तर किसी भी वैश्विक आर्थिक संकट या उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए पर्याप्त से अधिक है।

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