रिवर्स गियर में अमेरिका: महामंदी के बाद पहली बार लोगों ने शुरू किया 'एग्जिट', ब्रुकिंग्स रिपोर्ट में खुलासा

कभी प्रवासियों के लिए 'स्वर्ग' माना जाने वाला अमेरिका आज एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बन रहा है। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में अमेरिका छोड़ने वाले लोगों की संख्या वहां आने वालों से अधिक रही है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा साल 1935 के बाद पहली बार हुआ है।

27 Feb 2026  |  87

वॉशिंगटन |  कभी प्रवासियों के लिए 'स्वर्ग' माना जाने वाला अमेरिका आज एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बन रहा है। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में अमेरिका छोड़ने वाले लोगों की संख्या वहां आने वालों से अधिक रही है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा साल 1935 के बाद पहली बार हुआ है।

आंकड़ों में बड़ा उलटफेर: क्यों घट रही है आबादी?

अनुमान है कि 2025 में नेट माइग्रेशन नेगेटिव 10,000 से लेकर नेगेटिव 2.95 लाख के बीच रहा। शोधकर्ता वेंडी एडेलबर्ग और उनकी टीम ने इस गिरावट के पीछे दो मुख्य कारण बताए हैं:

आने वालों की कमी: वीजा पाबंदियों और सख्त नियमों के कारण नए प्रवासियों का आना लगभग बंद सा हो गया है।

जाने वालों की संख्या में वृद्धि: निर्वासन (Deportation) के साथ-साथ बड़ी संख्या में लोग अपनी मर्जी से देश छोड़ रहे हैं।

ट्रम्प प्रशासन की नीतियों का असर

ट्रम्प प्रशासन ने इस बदलाव को अपनी एक बड़ी उपलब्धि बताया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने सत्ता में वापसी के बाद से ही आव्रजन पर कड़ा प्रहार किया है:

मानवीय पैरोल का अंत: क्यूबा, हैती, निकारागुआ और वेनेजुएला जैसे देशों के लिए मानवीय रास्ते बंद कर दिए गए।

शरणार्थी कार्यक्रम में गिरावट: 2024 में जहाँ 1.05 लाख शरणार्थी आए थे, 2025 में यह संख्या गिरकर मात्र 7,600 रह गई।

ग्रीन कार्ड: विदेशों में जारी होने वाले ग्रीन कार्ड्स की संख्या में भी 20% की बड़ी कमी आई है।

सिर्फ प्रवासी ही नहीं, अमेरिकी नागरिक भी कर रहे पलायन

रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि न केवल विदेशी प्रवासी, बल्कि अमेरिकी नागरिक भी रिकॉर्ड संख्या में देश छोड़ रहे हैं।

वजह: लोग सस्ते रहन-सहन (Affordable living) और अधिक सुरक्षा की तलाश में विदेशों में बस रहे हैं।

स्वेच्छा से रवानगी: लगभग 2.10 लाख से 4.05 लाख प्रवासियों ने सुरक्षा एजेंसी 'ICE' की सख्ती और संभावित हिंसा के डर से स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ दिया। इनमें कुशल श्रमिक और अंतरराष्ट्रीय छात्र भी शामिल हैं, जो अब अन्य देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट

इस 'पलायन' का आर्थिक प्रभाव बेहद गंभीर होने वाला है। ब्रुकिंग्स के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की लेबर फोर्स (श्रम शक्ति) पूरी तरह प्रवासियों पर टिकी थी।

आर्थिक संकेतकप्रभाव का अनुमान
उपभोक्ता खर्च2025-26 के बीच $110 बिलियन तक की कमी।
रोजगार सृजनबेरोजगारी दर को स्थिर रखने के लिए अब बहुत कम नौकरियों की जरूरत होगी।
व्यापारिक प्रभावप्रवासियों पर निर्भर बिजनेस को भारी नुकसान, जिसे अब 'न्यू नॉर्मल' माना जा रहा है।

निष्कर्ष: अमेरिका जो कभी प्रवासियों की ताकत पर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना था, अब अपने ही लोगों और टैलेंट को खो रहा है। यह प्रवृत्ति न केवल वहां की सामाजिक संरचना बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन को भी बदल सकती है।

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